बिहार के बाद अब छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती को बढ़ावा, रायपुर समेत चार जिलों को जोड़कर बनेगा मखाना सर्किट

छत्तीसगढ़ सरकार मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद को जोड़कर मखाना सर्किट बनाएगी। इसके लिए वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था विकसित की जाएगी। अभी 50-60 हेक्टेयर में उत्पादन जारी है। 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की योजना से किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य है।

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में मखाना की खेती को बढ़ावा देने जा रही है। राज्य के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने रायपुर जिले के अंतर्गत आरंग के लिंगाडीह में मखाना सेंटर का अवलोकन करते हुए कहा कि रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद क्षेत्र सहित प्रदेश में मखाना की खेती की संभावना अत्यधिक है। उन्होंने मखाना उत्पादन क्षेत्रों व जिलों को सर्किट के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने मखाना खेती के विस्तार की संभावनाओं की जानकारी ली और कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को मखाना हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि आरंग क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों में लगभग 50 से 60 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती की जा रही है, जहां ग्रेड-6 गुणवत्ता का मखाना उत्पादन हो रहा है। इसकी बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

रायपुर के लिंगाडीह स्थित मखाना सेंटर में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम। 

नेताम ने कहा कि मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रायपुर, धमतरी, गरियाबंद एवं बालोद जिलों को जोड़ते हुए “मखाना सर्किट” के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण एवं विपणन की समेकित व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। मंत्री ने कहा कि मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित मखाना बोर्ड की योजनाओं से राज्य के किसानों को जोड़ते हुए तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण एवं विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से मखाना किसानों के लिए आय का नया विकल्प बनेगा और छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल होगा।

नेताम ने कहा कि मखाना उत्पादन में प्रसंस्करण की महत्वपूर्ण भूमिका है। कच्चे बीज के बजाय प्रोसेस कर तैयार मखाना बेचने से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। एक किलोग्राम बीज से 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।

उन्होंने कहा कि राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों एवं प्रगतिशील किसानों को मखाना उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल से राज्य को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से जोड़ने के बाद इस क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। वर्ष 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित है, जिससे उत्पादन क्षेत्र का विस्तार और नई संरचनाओं का विकास किया जाएगा।