निजी खरीद में किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले 2300-2400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 200-250 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में इस वर्ष बंपर उत्पादन के बावजूद सरकारी खरीद पिछले साल की तुलना में कम रही है। यूपी के खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल तक राज्य में 4.95 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 6.13 लाख टन खरीद हो चुकी थी।
खरीद केंद्रों पर किसान परेशान
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खरीद केंद्रों पर बारदाने की कमी और उठान न होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। पंजीकरण, सत्यापन और पोर्टल संबंधी दिक्कतों के कारण भी तौल प्रभावित हो रही है, जिससे किसान एमएसपी से वंचित रह जा रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष कपिल खटियान ने शनिवार को किसानों के साथ शामली जिले की चौसाना सहकारी समिति पर गेहूं खरीद में अनियमितताओं के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया।
कपिल खटियान ने बताया कि किसान कई दिनों से ट्रैक्टर-ट्रालियों में गेहूं लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उठान न होने से खरीद लगभग ठप हो गई है। प्रतिदिन केवल 150-200 क्विंटल गेहूं की तौल हो पा रही है, जो किसानों की संख्या के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने बताया कि जारी किए गए लगभग 450 टोकनों में से केवल 80-90 किसानों का ही गेहूं तौला जा सका है, जो खरीद की धीमी गति को दर्शाता है। बड़ी संख्या में किसानों का गेहूं अभी भी घरों में पड़ा है और उन्हें बार-बार समिति के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन करेगा। किसानों की मांग है कि तौल की गति बढ़ाई जाए और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गेेंहू क्रय केन्द्रों पर किसानों को आ रही समस्याओं के समाधान और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की थी।

खरीद प्रक्रिया में उलझे किसान
मुजफ्फरनगर जिले के किसान संजय चौधरी ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण और सत्यापन की जटिल प्रक्रिया के कारण किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच पा रहे थे। हालांकि, राज्य सरकार ने 30 अप्रैल 2026 तक फॉर्मर रजिस्ट्री के बिना भी खरीद की अनुमति दी है, लेकिन सत्यापन और अव्यवस्थाओं की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
खरीद से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल पर डेटा अपडेट न होने और e-PoP मशीनों में तकनीकी खराबी के कारण केंद्रों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई केंद्रों पर नए जूट के बोरों की कमी भी देखी गई है, जिससे किसानों को सीमित मात्रा में ही गेहूं लाने के लिए कहा जा रहा है।
फॉर्मर रजिस्ट्री से छूट के बाद खरीद केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है। इस बीच, केंद्र सरकार ने बारिश से प्रभावित गेहूं के लिए खरीद मानकों में छूट देते हुए लस्टर लॉस की सीमा 70% और सिकुड़े दानों की सीमा 20% तक कर दी है।
किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ केंद्रों पर अव्यवस्थाएं हैं, तो दूसरी ओर बदलते मौसम का खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते उठान (लिफ्टमेंट) तेज नहीं हुआ, तो मंडियों में आवक संभालना मुश्किल हो सकता है।
हरियाणा में यूपी किसानों का प्रवेश बंद
हरियाणा-यूपी सीमा पर किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यूपी के किसानों के लिए 30 अप्रैल तक हरियाणा की मंडियों में गेहूं लेकर प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए वहां गेहूं बेचने का विकल्प भी बंद हो गया है।