छत्तीसगढ़ में गन्ना किसानों को 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान, नई दर 2025-26 सत्र से ही लागू

छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ने की खरीदी दर 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। नई दर पेराई सत्र 2025-26 से लागू होगी और पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर से भुगतान मिलेगा। इसके साथ छत्तीसगढ़ की दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से अधिक हो गई है।

देश के कुल गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान भले ही कम है लेकिन गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में राज्य अब नंबर वन हो गया है। राज्य सरकार ने गन्ना खरीदी दर बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले से छत्तीसगढ़ में गन्ने की खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की तुलना में अधिक हो गई है। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा। 

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती थी। नई दर से किसानों को प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। गन्ना मूल्य में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब खेती की लागत और किसानों की आमदनी के बीच संतुलन बनाना कृषि नीति की प्रमुख चुनौती है।  

देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 

किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना तथा खेती को सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी से किसानों को उनकी कुल बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी मिलेगी। 

नई दर का लाभ कीमतों में बढ़ोतरी से पहले बेचे गए गन्ने पर भी लागू होगी। इससे चालू पेराई सत्र में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी राहत मिलेगी। यह व्यवस्था मूल्य वृद्धि के लाभ को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। गन्ने की खरीदी दर में वृद्धि का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं है। बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकते हैं। 

गन्ना उत्पादन में छत्तीसगढ़ का देश में 14वां स्थान है। कवर्धा (कबीरधाम) और सूरजपुर गन्ना खेती और उत्पादन के मामले में राज्य के प्रमुख जिले हैं। राज्य में चार सहकारी चीनी मिले हैं। इनमें कवर्धा स्थित भोरमदेव सहकारी चीनी मिल, सूरजपुर का महामाया सहकारी चीनी मिल, पंडरिया (कबीरधाम) का सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी चीनी मिल और बालोद स्थित दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल शामिल है।