हरियाणा: HKRN कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर कांग्रेस का पंचकूला में प्रदर्शन, हुड्डा बोले—संघर्ष जारी रहेगा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार का काम नियमित भर्तियां करना होता है, लेकिन बीजेपी सरकार राजपत्रित पदों को भी HKRN के जरिए भरकर ठेका प्रथा को बढ़ावा दे रही है। इससे दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों के आरक्षण को भी खत्म किया जा रहा है।

कांग्रेस ने कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत लगे तमाम कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर बुधवार को हरियाणा के पंचकूला में बड़ा धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता HKRN कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें उठाईं।

प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा, वरुण मुलाना, सतपाल ब्रह्मचारी, कर्मवीर बौद्ध समेत पार्टी के विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

इस मौके पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' के माध्यम से युवाओं को न्याय दिलाने का जो रास्ता दिखाया है, उसी कड़ी में आज हरियाणा में कांग्रेस पार्टी प्रदेश के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय और शोषण के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि HKRN के जरिए बीजेपी सरकार युवाओं का शोषण कर रही है। उन्होंने मांग उठाई कि HKRN के माध्यम से लगे सभी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में पक्का किया जाए और उन्हें समान पे-स्केल, डीए, प्रमोशन, आरक्षण और रिटायरमेंट लाभ दिए जाएं। साथ ही, भविष्य में तमाम नियुक्तियां नियमित भर्ती के तहत की जाएं।

हुड्डा ने कहा कि सरकार का काम नियमित भर्तियां करना होता है, लेकिन बीजेपी सरकार राजपत्रित पदों को भी HKRN के जरिए भरकर ठेका प्रथा को बढ़ावा दे रही है। इसके जरिए अप्रत्यक्ष तौर पर दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों के आरक्षण को भी खत्म किया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान सरकारी पदों की संख्या बढ़ाकर 4 लाख की गई थी, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सके और लोगों को बेहतर सरकारी सेवाएं मिल सकें। लेकिन बीजेपी ने इस संख्या को घटाकर मात्र ढाई लाख कर दिया और हरियाणा को बेरोजगारी के मामले में सिरमौर बना दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार पदों की संख्या बढ़ाकर फिर से 4 लाख नहीं करती और कौशल कर्मियों को पक्का नहीं करती, तब तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप 

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान कच्चे कर्मचारियों का वोट लेने के लिए 1,25,000 कौशल कर्मियों को पक्का करने का ऐलान किया था। इसके लिए बाकायदा अधिसूचना जारी करने का ऐलान किया गया था। लेकिन लगभग दो साल बाद भी आज तक इन कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का कोई कानून या आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। इसी वजह से इन तमाम कर्मचारियों के सिर पर हमेशा नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान इन कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच भ्रम फैलाया था। बीजेपी ने यह झूठ बोला कि कांग्रेस सरकार आने पर इन कर्मियों को नौकरी से हटा दिया जाएगा, जबकि कांग्रेस उस समय भी और आज भी यह मांग करती है कि इन कर्मियों को पक्का किया जाए और उनके वेतन में बढ़ोतरी हो। झूठ बोलकर वोट लेने वाली बीजेपी का सच चुनाव के बाद सबके सामने उजागर हो गया। सच यह है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की बीजेपी सरकार की कोई मंशा ही नहीं है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान बनी कच्चे कर्मियों को पक्का करने वाली नियमितीकरण नीति पर कुछ दिन पहले ही हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुहर लग चुकी है। कांग्रेस सरकार की उस नीति को अदालत ने पूरी तरह वैध माना है। इस नीति से गेस्ट टीचर्स समेत हजारों कच्चे कर्मचारियों को लाभ मिला है। लेकिन बीजेपी अपने साढ़े 11 साल के शासनकाल में आज तक नियमितीकरण की ऐसी कोई नीति नहीं बना सकी। इसका खामियाजा इन कच्चे कर्मचारियों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। 

कौशल निगम बना शोषण का जरिया 

कौशल निगम शिक्षित व योग्य युवाओं को कम मजदूरी पर अस्थायी तौर पर सरकार के विभागों, बोर्ड आदि को ठेके पर मुहैया करवाने की व्यवस्था है। यह एक तरह का लेबर एक्सचेंज है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कौशल निगम गरीब व शिक्षित युवाओं की मजदूरी का व्यापार करता है और उनकी मजदूरी का 1 प्रतिशत वसूल भी करता है। पार्टी ने इसे सरकार की “शर्मनाक साजिश” करार दिया। 

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा पूरे देश में बेरोजगारी के मामले में नंबर वन राज्य है। इसीलिए हाईली क्वालिफाइड युवा भी चतुर्थ श्रेणी के काम करने के लिए विवश कर दिए गए हैं। HKRN के अंतर्गत कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सन्स को एक साल या उससे कम अवधि के लिए डिप्लॉय किया जाता है। उसके बाद अथॉरिटी उनका रिव्यू करती है। यदि अथॉरिटी संतुष्ट नहीं होती है, तो उन्हें हटा दिया जाता है। इस कारण उनका भारी शोषण होता है।

दीपेंद्र हुड्डा ने भर्ती व्यवस्था पर उठाए सवाल

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि HKRN के जरिए लगे युवाओं को सरकार कर्मचारी ही नहीं मानती। सरकार कहती है कि इन्हें ‘एम्प्लॉय’ नहीं, बल्कि ‘डिप्लॉय’ किया गया है। उन्होंने मांग उठाई कि HKRN में युवाओं का शोषण बंद हो और HKRN के माध्यम से भर्ती सभी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में पक्का किया जाए। आने वाले समय में HPSC, HSSC, SSC आदि के जितने भी पदों पर भर्तियां हों, वे सभी नियमित भर्ती के तहत हों। इनमें आरक्षण और अन्य सभी निर्धारित प्रावधानों का पूरा ध्यान रखा जाए। 

दीपेंद्र हुड्डा ने ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ (NFS) के आधार पर आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एससी और ओबीसी वर्ग के युवाओं को उनके आरक्षण के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवाओं की योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है और राज्य के युवा UPSC, JEE तथा NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि युवाओं के मुद्दों को लेकर कांग्रेस अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि बुधवार का प्रदर्शन केवल “ट्रेलर” है और यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।