भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वर्ष 2025-26 तक 535 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद देश के कृषि-खाद्य निर्यात में 20% का योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद, भारत में कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण के बीच का अंतर अभी काफी बड़ा है। भारत दूध, मसालों और दालों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है। फिर भी यहां केवल 4.5% फलों और 2.7% सब्जियों का प्रसंस्करण होता है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह अंतर एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।
राज्य के पास विविध और व्यापक कृषि आधार उपलब्ध है। राज्य में धान का उत्पादन करीब 115 लाख मीट्रिक टन है। इसके अलावा मक्का, गेहूं, चना और तिवड़ा का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। बागवानी में 6,789 हजार मीट्रिक टन सब्जियां, 2,430 हजार मीट्रिक टन फल और 462 हजार मीट्रिक टन मसालों का उत्पादन शामिल है। यहां प्लांटेशन फसलें, सुगंधित एवं औषधीय पौधों का भी उत्पादन होता है। वनों से महुआ, इमली, साल बीज, आंवला और हर्रा जैसे लघु वनोपज की बड़ी मात्रा प्राप्त होती है। इनका अभी तक सीमित प्रसंस्करण होता है और वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए विशेष तथा उच्च लाभ वाले अवसर प्रदान करते हैं। राज्य में 1,747 हजार टन दुग्ध उत्पादन होता है और मत्स्य उत्पादन 8.7 लाख टन तक पहुंच चुका है। राज्य से कुल कृषि निर्यात 10,992 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिसमें चावल, वनस्पति तेल, शेलैक (लाह) और मसाले प्रमुख हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के डायरेक्टर इंडस्ट्रीज, प्रभात मलिक ने कहा, “राज्य में फसलों, वनोपज और पशुधन उत्पादों की असाधारण विविधता है, और इसका अधिकांश हिस्सा कच्चे रूप में ही राज्य से बाहर चला जाता है। यही वह क्षेत्र है जहां निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं। हमारी नीति विशेष रूप से इस तरह तैयार की गई है कि प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए स्रोत के निकट इकाइयां स्थापित करना आर्थिक रूप से लाभकारी बने, बजाय इसके कि लंबी सप्लाई चेन में अतिरिक्त लागत और खराब होने का जोखिम उठाया जाए। कच्चे माल की उपलब्धता हमारा एडवांटेज है और प्रोत्साहन योजनाएं इसे निर्णायक बनाती हैं।”
सरकार की तरफ से प्रोत्साहन
औद्योगिक विकास नीति (IDP) 2024-30 के तहत एग्रो और फूड प्रोसेसिंग को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया है। इसके तहत प्लांट और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के निवेश पर निवेशकों को विशेष प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किया जाएगा। इस पैकेज में 30% की फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट (FCI) सब्सिडी शामिल है, जिसमें रोजगार सृजन के आधार पर 1.5 गुना तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। निवेशक चाहें तो FCI सब्सिडी के स्थान पर 12 वर्षों तक नेट SGST रीइंबर्समेंट का विकल्प भी चुन सकते हैं।
अन्य लाभों में पांच वर्षों तक प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये तक 50% ब्याज सब्सिडी तथा 12 वर्षों के लिए 100% बिजली शुल्क में छूट शामिल हैं। भूमि संबंधी लाभों में स्टांप शुल्क में 100% छूट और पंजीकरण व भूमि परिवर्तन शुल्क में 50% राहत दी जाएगी। निवेशकों को ईपीएफ में योगदान पर 75% रीइंबर्समेंट, पांच वर्षों तक वेतन का 20% रोजगार सृजन सहायता, 1 करोड़ रुपये तक 50% ईटीपी सब्सिडी तथा 10 वर्षों के लिए निर्यात परिवहन लागत पर 75% परिवहन सब्सिडी भी मिलेगी। इसकी अधिकतम सीमा एफसीआई के 35% तक होगी।
इस नीति की एक प्रमुख विशेषता मंडी शुल्क में छूट है, जिसके तहत पांच वर्षों तक प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये की सीमा तक 100% मंडी शुल्क माफ किया जाएगा। इससे उन इनपुट लागतों में सीधी कमी आएगी, जिन पर अधिकांश प्रतिस्पर्धी राज्य ध्यान नहीं देते। उदाहरण के तौर पर, यदि 250 कर्मचारियों के साथ 100 करोड़ रुपये का एफसीआई निवेश किया जाता है, तो कुल प्रोत्साहन पैकेज लगभग 68.80 करोड़ रुपये का बनता है, जो कुल निवेश का करीब 69% है। 200 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश करने वाली पहली पांच एंकर इकाइयों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जबकि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए कस्टमाइज्ड पैकेज उपलब्ध होंगे।
राज्यभर में फूड पार्कों का नेटवर्क
छत्तीसगढ़ ने राज्य और जिला स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की है। धमतरी में स्थापित फूड पार्क तैयार औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है। सूरजपुर, सरगुजा, जशपुर, बेमेतरा, रायपुर, राजनांदगांव, गरियाबंद, कांकेर और सुकमा में फूड पार्क हैं। इस तरह प्रसंस्करण क्षमता कृषि उत्पादन क्षेत्रों के करीब स्थापित हो रही है और कच्चे माल के परिवहन की लागत कम होती है।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं, बीज एवं मृदा परीक्षण लैब मौजूद हैं, जबकि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय नवा रायपुर में एक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित कर रहा है। राज्य में 70 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र बड़ी एकीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए अतिरिक्त विकल्प प्रदान करते हैं, जहां आंतरिक सड़कें, बिजली और जलापूर्ति जैसी विकसित सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बिजली, लॉजिस्टिक्स और श्रम
26,288 मेगावाट की स्थापित विद्युत क्षमता के साथ छत्तीसगढ़ भारत का सबसे बड़ा पावर सरप्लस राज्य है। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं होती है और एचटी टैरिफ 6.65 रुपये प्रति यूनिट से शुरू होता है। यह ऊर्जा-सघन खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए लागत के लिहाज से बड़ा लाभ है। यह राज्य सात राज्यों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है। इससे घरेलू उपभोक्ता बाजारों और निर्यात केंद्रों तक वितरण लागत कम हो जाती है।
कुशल श्रम के मोर्चे पर 58,832 सीटों की संयुक्त क्षमता वाले 310 आईटीआई, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फूड प्रोसेसिंग तथा कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी जैसे विशेष संस्थान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराते हैं। कौशल का अधिकार कानून, भारत का अपनी तरह का पहला कानून है जो इस व्यवस्था को और मजबूत बनाता है।