मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन, पहली वार्ता बेनतीजा; राज्य सरकार ने बनाई समिति

मध्य प्रदेश में मूंग की 100 फीसदी एमएसपी खरीद, उर्वरक वितरण व्यवस्था में सुधार और ई-टोकन प्रणाली समाप्त करने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। राजधानी भोपाल में सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच पहली वार्ता बेनतीजा रही। किसान लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 100 प्रतिशत सरकारी खरीद और उर्वरक वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी पहुंचे हजारों किसानों और राज्य सरकार के बीच मंगलवार देर रात हुई पहली दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों के प्रति वह संवेदनशील है और सभी मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक एवं शीघ्र कदम उठाए जाएंगे।

नर्मदापुरम से शुरू हुई पदयात्रा के जरिए किसान भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद किसानों ने भोपाल-नर्मदापुरम राजमार्ग पर धरना शुरू कर दिया। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

किसानों की सबसे बड़ी मांग ग्रीष्मकालीन मूंग की पूरी उपज की एमएसपी पर सरकारी खरीद है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में केवल अनुमानित उत्पादन का 25 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। इस वर्ष मूंग का एमएसपी 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन सरकारी खरीद की सीमा के कारण किसानों को अपनी बड़ी मात्रा में उपज खुले बाजार में 6,000 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचनी पड़ रही है। इससे उन्हें प्रति क्विंटल 1,500 से 2,500 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों का तर्क है कि जब अन्य दलहनी फसलों की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने की व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो मूंग को इससे बाहर रखना उचित नहीं है। उनका कहना है कि सरकार ने स्वयं किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन फसल तैयार होने के बाद खरीद का कोटा सीमित कर दिया गया।

आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा उर्वरकों की ई-टोकन व्यवस्था है। किसानों का आरोप है कि पोर्टल पर स्लॉट नहीं मिलते, सर्वर बार-बार ठप रहता है और जटिल प्रक्रिया के कारण अधिकांश किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पाता। इसके साथ ही खरीफ सीजन में डीएपी और यूरिया की कमी तथा वितरण में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी किसानों में नाराजगी है। उनकी मांग है कि उर्वरकों का वितरण भूमि रिकॉर्ड के आधार पर पारदर्शी तरीके से किया जाए और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगे।

प्रदर्शनकारी किसान एक सप्ताह का राशन, पानी, तिरपाल और भोजन बनाने का सामान लेकर राजधानी पहुंचे हैं, जिससे संकेत मिलते हैं कि वे लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ आए हैं। मंगलवार रात उन्होंने सड़क किनारे ही डेरा डालकर भोजन बनाया और खुले आसमान के नीचे रात बिताई। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं और किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का उनका इरादा नहीं है।

आंदोलन के कारण भोपाल-नर्मदापुरम मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रशासन ने कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया, जबकि एहतियात के तौर पर शहर के कुछ स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। राजधानी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सरकार ने वार्ता जारी रखने और समाधान निकालने का भरोसा दिया है, लेकिन किसान संगठन स्पष्ट कर चुके हैं कि केवल आश्वासन से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।

सरकार ने बनाई समिति 

राज्य सरकार ने किसानों की विभिन्न मांगों, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की 100 प्रतिशत खरीद भी शामिल है, को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार को विश्वास है कि बातचीत के जरिए गतिरोध का समाधान निकल आएगा।