किसानों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप सब्सिडी वाले उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराने तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल व्यवस्था का प्रदेश में चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। डिजिटल तकनीक आधारित इस व्यवस्था के माध्यम से उर्वरक की मांग, उपलब्धता और वितरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 के माध्यम से प्रदेश के 18 जिलों में डिजिटल उर्वरक वितरण व्यवस्था लागू हो चुकी है। कृषि विभाग की योजना चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू करने की है।
सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि सिरोही और राजसमंद जिलों में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान प्राप्त सकारात्मक परिणामों ने डिजिटल एवं किसान-केंद्रित वितरण व्यवस्था की उपयोगिता को प्रमाणित किया है।
इसके अगले चरण में 5 जिलों बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू को जोड़ा गया। इसके बाद डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के वर्जन 3.77 का विस्तार 11 और जिलों—बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक—में किया गया।
एक लाख से अधिक किसानों ने की बुकिंग
कृषि आयुक्त गोयल के अनुसार, पहले दो चरणों में ही एक लाख से अधिक किसानों ने करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिजिटल बुकिंग की है। किसानों ने इस प्रक्रिया को सरल, सुविधाजनक और उपयोगी बताया है।
नई व्यवस्था में किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद 48 घंटे की वैधता वाला टोकन मिलेगा। इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। 48 घंटे के भीतर उर्वरक नहीं लेने पर किसान को दोबारा बुकिंग करनी होगी।
कृषि विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से वास्तविक आवश्यकता वाले किसानों को प्राथमिकता मिलने के साथ-साथ उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे किसानों को उर्वरक के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक जाने तथा लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।
फार्मर आईडी से होगी उर्वरक बिक्री
नई व्यवस्था में उर्वरक की बिक्री फार्मर आईडी के माध्यम से की जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार, राजस्थान में अब तक 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। विभाग में जल्द एग्रीस्टैक कमिश्नरेट की स्थापना भी की जा रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं और किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं को और मजबूती मिलेगी।
कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बिक्री व्यवस्था से सब्सिडी वाले यूरिया की अनधिकृत बिक्री पर रोक लगाने और वास्तविक किसानों तक उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, अनावश्यक खरीद पर अंकुश लगेगा और जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
टैगिंग और ओवरचार्जिंग पर भी नियंत्रण
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद दुकानदारों द्वारा निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने और उर्वरक के साथ दूसरे उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग करने जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है। साथ ही, अधिकारियों और डीलरों को स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
केंद्र से वित्तीय प्रोत्साहन राशि
राज्य सरकार को इस डिजिटल व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी मिल रहा है। कृषि विभाग के अनुसार, सिरोही और राजसमंद में व्यवस्था लागू करने पर करीब 175 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। वहीं, इसे पूरे राजस्थान में लागू करने पर करीब 675 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त होने की संभावना है।