रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए सरकार कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। इसके तहत सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के लिए एक नई व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि किसानों को उनकी फसल और आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित हो तथा उर्वरकों के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राजस्थान सरकार ने फर्टीलाइजर सेल्स एप्लिकेशन सिस्टम (एफएसएएस) के माध्यम से किसानों को अनुदानित उर्वरकों की बिक्री शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजसमंद और सिरोही जिलों में लागू किया गया है।
राजस्थान के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, फर्टीलाइजर सेल्स एप्लिकेशन सिस्टम (एफएसएएस) के माध्यम से किसानों को उनकी फार्मर आईडी के आधार पर अनुदानित उर्वरकों का वितरण किया जाएगा। इससे उर्वरक वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी तथा वास्तविक किसानों को समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
राजसमंद जिले से हुई शुरुआत
इस प्रणाली की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर राजसमंद जिले से की गई है। अब किसान अपने मोबाइल फोन के माध्यम से उर्वरकों की बुकिंग कर सकेंगे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें समय पर उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा और उनके समय तथा श्रम, दोनों की बचत होगी। साथ ही उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
महाराष्ट्र में भी पायलट प्रोजेक्ट
‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ मोबाइल ऐप के जरिए उर्वरकों की बिक्री को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में पायलट बेसिस पर लागू किया गया है। हालांकि, कई तकनीकी दिक्कतों के चलते महाराष्ट्र में किसान और फर्टिलाइजर डीलर एप के जरिए यूरिया और DAP जैसे सब्सिडी वाले फर्टिलाइजर की बिक्री का विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि ऐप शुरू करने से पहले किसानों को सही ट्रेनिंग नहीं दी गई।
उर्वरक बिक्री के लिए नेशनल फ्रेमवर्क
ईरान युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के चलते किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाले उर्वरकों के वितरण के लिए एक नई व्यवस्था विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार ‘सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के लिए राष्ट्रीय ढांचा (National Framework for the Sale of Subsidised Fertilisers)’ तैयार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उर्वरकों की बिक्री को किसानों की भूमि जोत और फसल की वास्तविक आवश्यकता से जोड़ा जाएगा।