हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे खरीफ सीजन के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान से बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत 31 जुलाई से पहले अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा अवश्य करा लें।
योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान पर किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है। चालू खरीफ सीजन में मक्का और धान की फसलों को इस योजना के तहत बीमा कवरेज के लिए अधिसूचित किया गया है।
हमीरपुर जिले में मक्के की फसल का बीमा के लिए सभी तहसीलों और उप-तहसीलों को अधिसूचित किया गया है। वहीं धान फसल बीमा का लाभ केवल हमीरपुर, नादौन और भोरंज तहसीलों के किसानों को मिलेगा।
कृषि विभाग के अनुसार मक्का और धान की फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। किसानों को प्रति कनाल 48 रुपये, यानी प्रति हेक्टेयर 1,200 रुपये का प्रीमियम जमा करना होगा। बीमित राशि 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है।
बीमा कराने के लिए किसान अपने आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र और भूमि संबंधी दस्तावेजों के साथ निकटतम लोक मित्र केंद्र, बैंक शाखा या ऑनलाइन माध्यम से नामित बीमा कंपनी के जरिए आवेदन कर सकते हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने बैंक अथवा अन्य वित्तीय संस्थानों से फसल ऋण लिया है, उनका बीमा संबंधित वित्तीय संस्थानों के माध्यम से स्वतः कर दिया जाएगा। हालांकि, यदि कोई ऋणी किसान इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहता है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित बैंक शाखा में लिखित घोषणा-पत्र देकर योजना से बाहर हो सकता है।
राज्य सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी फसलों का बीमा करा लें, ताकि खरीफ सीजन के दौरान प्रतिकूल मौसम या प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में उन्हें समय पर वित्तीय सुरक्षा मिल सके।
खरीफ 2025 में प्रदेश के 10 जिलों के किसानों ने 198.56 लाख, राज्य सरकार ने 54.90 लाख और केंद्र सरकार ने 494.69 लाख रुपये का प्रीमियम दिया था। इस तरह कुल प्रीमियम 7.48 करोड़ रुपये और बीमित राशि 99.28 करोड़ रुपये थी। हालांकि बीमा कंपनियों ने 54 किसानों को कुल पांच लाख रुपये का दावा भुगतान किया था।