महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी चीनी मिलों के लिए करीब 750 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को मंजूरी दी है। इसका इस्तेमाल 2025-26 के पेराई सत्र के गन्ना किसानों के बकाया उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) का भुगतान करने और 2026-27 के पेराई सत्र के संचालन की जरूरतें पूरी करने में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य मिलों की नकदी संबंधी दिक्कतों को कम करना और किसानों के लंबित गन्ना भुगतान को निपटाने में मदद करना है।
सरकार के मुताबिक, सॉफ्ट लोन से गन्ना किसानों और सहकारी चीनी मिलों, दोनों को राहत मिलेगी। किसानों के लिए FRP का समय पर भुगतान महत्वपूर्ण है, वहीं मिलों को बकाया देनदारियों के साथ-साथ अगले पेराई सत्र की तैयारियों के लिए भी वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है।
FRP वह वैधानिक मूल्य है, जिसका भुगतान चीनी मिलों को गन्ना किसानों को करना होता है। 2026-27 के नए पेराई सत्र की तैयारियों के बीच मिलों को रियायती दर पर वित्त उपलब्ध कराने का फैसला उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद कर सकता है।
चीनी क्षेत्र के लिए यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में 2026-27 के पेराई सत्र की तैयारियां शुरू हो रही हैं। सॉफ्ट लोन के जरिए सरकार का लक्ष्य मिलों पर वित्तीय दबाव कम करने के साथ किसानों के बकाया FRP भुगतान को आगे बढ़ाना है।
एक अन्य फैसले में महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत सीमा) अधिनियम, 1961 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गांव में राज्य कृषि निगम की जमीन उसके मूल मालिकों को वापस करने का रास्ता साफ होगा।