केंद्र सरकार ने बिहार में गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत 11,18,937 पक्के घरों को मंजूरी दी है। इसके लिए 13,427 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भी लागू की जाएगी। इसके तहत किसानों को बाढ़, सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पटना में प्रधानमंत्री आवास योजना के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ये घोषणाएं कीं। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
आवास पैकेज के तहत 11.19 लाख घरों की मंजूरी का स्वीकृति पत्र बिहार सरकार को सौंपा गया। चौहान ने कहा कि यह पहल केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है।
बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य के लिए 24,30,327 घरों को मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल 29,164 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से योजना के क्रियान्वयन में तेजी आई है और लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से सहायता पहुंचाई जा रही है।
फसल नुकसान से किसानों को सुरक्षा
फसल बीमा के महत्व पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि बिहार में PMFBY लागू होने से प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ किसानों को सुरक्षा कवच मिलेगा। फसल क्षति होने पर पात्र किसानों को योजना के तहत मुआवजा मिलेगा, जिससे खेती से जुड़े वित्तीय जोखिम और अनिश्चितता कम होगी।
उन्होंने बिहार सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं और उन्हें उन प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देना जरूरी है, जिन पर उनका नियंत्रण नहीं है। चौहान ने कृषि को अधिक लाभकारी और मजबूत बनाने के लिए खरीद व्यवस्था, सहायता प्रणाली और कृषि तकनीक तक किसानों की पहुंच मजबूत करने पर भी जोर दिया।
महिला आय और ग्रामीण बाजारों पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर जिले में शी-मार्ट स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। महिला उद्यमियों को उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग में भी सहायता की जरूरत है।
चौहान ने बिहार में किसान आईडी बनाए जाने की प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 53.83 लाख किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल पहचान व्यवस्था से सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण कनेक्टिविटी के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने सड़क, मकान और कृषि को ग्रामीण विकास के तीन प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास बिहार के गांवों को मजबूत करने, ग्रामीण आय बढ़ाने और राज्य के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण होंगे।