पंजाब में किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को पंजाब सरकार के मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष के आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों में किसान और मजदूर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ लंगर, दूध, कपड़े और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंचे।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब में आठ कैबिनेट मंत्रियों के आवासों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान किया था और सोमवार को बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से बातचीत की मांग पहले ही की जा चुकी है। यदि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पंधेर ने कहा कि यह एक दिन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पांच दिवसीय कार्यक्रम है और राज्यभर से लोग इसमें शामिल हुए हैं। सरकार के रुख पर चर्चा और आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए 16 सितंबर को बैठक बुलाई गई है।
एमएसपी पर फसल खरीद
किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब सरकार से बासमती धान, मक्का, मूंग, सरसों और आलू समेत मांग-पत्र में दर्ज फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर खरीद रोकने तथा इन फसलों की एमएसपी पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। धान के मौजूदा सीजन को देखते हुए किसानों के सामने पैदा हुई बिजली आपूर्ति और उर्वरकों की कमी की समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग भी की गई।
मोर्चे ने किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करने की भी मांग उठाई। आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई। पंजाब में बाढ़, गिरते भूजल स्तर तथा बढ़ते प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए प्रभावी नीति बनाने की मांग भी की गई।
केंद्रीय कानूनों का विरोध
किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के बीज अधिनियम, 2025 और सहकारी कानून, 2026 का भी विरोध किया है। साथ ही, मनरेगा को खत्म कर बनाए गए जीरामजी कानून और बिजली संशोधन विधेयक, 2025 को रद्द करने के लिए पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। किसान नेताओं का कहना है कि पंजाब में प्रीपेड बिजली मीटर लगाने का काम तुरंत बंद किया जाए।
इंडो-यूएस ट्रेड डील का विरोध
मोर्चे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने के समर्थन में पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की। इसके अलावा, शंभू और खनौरी मोर्चों से किसानों की ट्रॉलियों सहित जो भी सामान जब्त किया गया है, उसे तुरंत वापस करने की मांग की गई।
किसान मजदूर मोर्चा ने हर तरह के आबादकार किसानों और मजदूरों को उनके द्वारा जोती-बोई जा रही जमीन पर मालिकाना हक दिए जाने की मांग भी उठाई है।
मुकदमे वापस लेने की मांग
किसान मजदूर मोर्चा ने किसान आंदोलनों के दौरान पुलिस और रेलवे अधिकारियों द्वारा दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की मांग की। पराली जलाने से जुड़े मामलों को भी वापस लेने की मांग की गई। आंदोलनों के दौरान शहीद हुए किसानों और मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई गई।
इसके साथ ही लैंड पूलिंग नीति वापस लेने, भारतमाला परियोजना के लिए किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण पर रोक लगाने और पंजाब में नशे पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने की मांग की गई। युवाओं के लिए पक्के और उचित रोजगार की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई।
ड्रोन मैपिंग रोकने की मांग
मोर्चे ने ग्रामीणों की सहमति के बिना निजी संस्थानों द्वारा ड्रोन के जरिए गांवों की मैपिंग किए जाने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। संगठन ने पंजाब के किसानों, व्यापारियों और उद्योगों के लिए नए बाजार खोलने के उद्देश्य से पड़ोसी पाकिस्तान के साथ व्यापार गलियारा खोलने की मांग भी उठाई है।
कई स्थानों पर किसानों का प्रदर्शन
संगरूर-सुनाम में कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन को भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद के जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने संबोधित किया।
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में बीकेयू बहिरामके के बलवंत सिंह बहिरामके, बलदेव सिंह जीरा, बीकेयू क्रांतिकारी और किसान मजदूर मोर्चा पंजाब के मलकीत सिंह गुलामीवाला मौजूद रहे।
होशियारपुर में किसान मजदूर हितकारी सभा के ओंकार सिंह पुराना भंगाला और बीकेयू दोआबा के मनजीत सिंह राय ने किसानों को संबोधित किया। किसान मजदूर संघर्ष समिति के परमजीत सिंह भुल्ला भी मौजूद रहे। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के सतनाम सिंह पन्नू और महासचिव रणबीर सिंह राणा मौजूद रहे।
गुरदासपुर में मंत्री लाल चंद कटारुचक के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में किसान मजदूर संघर्ष समिति के सविंदर सिंह चौटाला और हरविंदर सिंह मसाणियां मौजूद रहे।
लुधियाना में भारतीय किसान मजदूर यूनियन के दिलबाग सिंह गिल, जालंधर में किसान मजदूर संघर्ष समिति के सलविंदर सिंह जाणियां और शेर सिंह माहिवाल तथा अमृतसर में सतनाम सिंह मनोचाहल और बाबा गुरबचन सिंह चब्बा मौजूद रहे।
सरकार के रवैये पर सवाल
किसान मजदूर मोर्चा के नेताओं ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर किसानों और मजदूरों के प्रदर्शन के बावजूद पंजाब सरकार ने अभी तक मोर्चे के साथ कोई बातचीत नहीं की है। उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय किसानों और मजदूरों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए।