राजस्थान में गेहूं खरीद की अवधि घटाई, 30 जून की बजाय अब 31 मई तक होगी खरीद

राजस्थान में गेहूं खरीद की समय सीमा 30 जून से घटाकर 31 मई करने के फैसले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

राजस्थान में एक ओर जहां किसानों की तैयार फसलों पर बारिश और ओलावृष्टि की मार पड़ रही है, वहीं गेहूं की उपज प्रभावित होने से सरकारी खरीद पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन राज्य सरकार ने गेहूं खरीद की अवधि 30 जून से घटाकर 31 मई कर दी है।

खराब मौसम और अनाज में नमी के चलते अभी तक राज्य में गेहूं खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। इस बीच, राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने आदेश जारी कर खरीद की अवधि घटा दी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए कम समय मिलेगा और खरीद केंद्रों पर भीड़ बढ़ेगी।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, रबी खरीद सीजन 2026-27 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद का कार्य 16 मार्च से 31 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके लिए किसानों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 मई निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों में गेहूं खरीद 30 जून तक चलती रही है।

राज्य सरकार ने खरीद अवधि तो घटा दी है, लेकिन बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से फसलों को हुए व्यापक नुकसान के बावजूद गुणवत्ता मानकों में फिलहाल कोई छूट नहीं दी गई है। इससे किसानों में नाराजगी है।

गेहूं की उपज प्रभावित

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते राजस्थान सहित अन्य गेहूं उत्पादक राज्यों में उपज प्रभावित हुई है। गेहूं को पकने के लिए पर्याप्त धूप और गर्मी न मिलने तथा कटाई के समय भीगने से दानों की चमक फीकी पड़ गई है और वे सिकुड़ गए हैं। ऐसे में आशंका है कि किसानों की उपज औसत गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाएगी, जिसे लेकर छूट देने की मांग उठ रही है।

औने-पौने दाम पर बेचने का खतरा

राजस्थान में खरीद अवधि कम होने और पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं के चलते किसानों को खुले बाजार में कम दाम पर उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने गेहूं पर 2585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के अलावा 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की है, लेकिन लागू शर्तों ने चिंता बढ़ा दी है। खरीद अवधि घटने से कम समय में अधिक मात्रा में गेहूं मंडियों में पहुंचेगा, जिससे रिजेक्शन की आशंका बढ़ सकती है। साथ ही, खरीद और भंडारण व्यवस्था पर भी दबाव पड़ सकता है।