हरियाणा में कपास उत्पादकता 30% घटी, किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का नुकसानः एचएयू की रिपोर्ट

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार खरीफ 2025 में उत्पादकता घटने और दाम कम मिलने की वजह से प्रदेश के कपास किसानों को प्रति एकड़ औसतन 15,142 रुपये का नुकसान हुआ। यह रिपोर्ट पिछले महीने एग्रीकल्चर ऑफिसर्स वर्कशॉप में प्रस्तुत की गई।

हरियाणा में कपास उत्पादकता 30% घटी, किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का नुकसानः एचएयू की रिपोर्ट

हरियाणा के किसानों के लिए कपास की खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। राज्य के किसानों को कपास की खेती में प्रति एकड़ औसतन 15 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। इसकी मुख्य वजह है उत्पादकता में गिरावट और किसानों को उपज की कम कीमत मिलना। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की हाल की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। खरीफ सीजन 2025 की यह रिपोर्ट 13-14 फरवरी 2026 को एग्रीकल्चर ऑफिसर्स वर्कशॉप में प्रस्तुत की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, कपास की प्रति एकड़ औसत पैदावार 2025 में सिर्फ चार क्विंटल रह गई, जो पिछले साल 5.70 क्विंटल थी। यानी प्रति एकड़ उत्पादकता 30 प्रतिशत कम हो गई। किसानों को मिलने वाली कीमत में भी कमी आई है। औसत कीमत पिछले साल 7,071 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो इस साल 15 प्रतिशत घटकर 6,020 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। 

मई 2025 में केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,710 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। 

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के किसानों के लिए प्रति एकड़ औसत लागत 40,024 रुपये थी। इसके बदले उन्हें कपास की बिक्री से 24,081 रुपये और बाई-प्रोडक्ट से 801 रुपये प्राप्त हुए। इस तरह किसानों को कपास की खेती में प्रति एकड़ 15,142 रुपये का नुकसान हो रहा है। लागत के आकलन में खेत तैयार करने, सिंचाई, बीज, उर्वरक, तुड़ाई आदि को जोड़ा गया है।

इस अध्ययन का हिस्सा रहे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग में सहा. वैज्ञानिक डॉ. विनय महला ने रूरल वॉयस को बताया कि विश्वविद्यालय हर साल खरीफ व रबी की रिपोर्ट तैयार करता है। कपास के मामले में देखा जाए तो साल 2017 के बाद से किसानों को नुकसान हो रहा है। कपास की फसल पर कीटों और रोगों की मार के चलते यह समस्या खड़ी हुई है। अगर नई किस्में नहीं आईं तो आने वाले 3 से 5 वर्षों में हरियाणा में कपास किसानों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। 

राज्य में कपास की खेती मुख्य रूप से हिसार, भिवानी, फतेहाबाद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में होती है। कपास की खेती में किसानों का सबसे अधिक खर्च फतेहाबाद जिले में आया। उनका प्रति एकड़ खर्च 48,721 रुपये था। उनका नुकसान भी 17,315 रुपये प्रति एकड़ था। हालांकि सबसे अधिक 17,515 रुपये प्रति एकड़ का औसत नुकसान हिसार के किसानों का था। बाकी जिलों में महेंद्रगढ़ के किसानों का औसत नुकसान 14,144 रुपये,  चरखी दादरी का 15,276 रुपये, रेवाड़ी का 9,548 रुपये, भिवानी का 14,852 रुपये और सिरसा के किसानों का 11,250 रुपये प्रति एकड़ था।

रूरल वॉयस ने राज्य के कई कपास किसानों से बात की। सिसवाला, हिसार के पवन कुमार ने बताया कि बीते वर्ष 8.7 हैक्टेयर में कपास की खेती की थी, जिसमें 3 किवंटल के लगभग कपास उत्पादन हुआ व मंडी में 5600 रुपये का भाव प्राप्त हुआ। पवन के अनुसार उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ा और वे यह नुकसान 2018 से लगातार झेल रहे हैं।

एक अन्य किसान हरपाल सिंह ने बताया कि बीते वर्ष 4 हेक्टेयर में कपास की खेती की थी। उन्हें खेतों में गुलाबी सूंडी का सामना करना पड़ा व बारिश की वजह से फसल भी खराब हुई। जब मंडी में फसल बेचने गए तब उन्हें लागत भी नहीं मिली। 

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