हरियाणा में गेहूं खरीद पर विवाद, बायोमेट्रिक नियमों के खिलाफ किसानों का विरोध तेज

हरियाणा की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद शुरू होते ही बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ट्रैक्टर नंबर प्लेट और फोटो वाले नए नियमों ने विवाद खड़ा कर दिया है। मंडियों में किसान और आढ़ती नए नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

हरियाणा की अनाज मंडियों में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है। हालांकि, शुरुआत से ही खरीद प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। एक तरफ खराब मौसम और नमी की वजह से खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पाई है, तो दूसरी तरफ सरकार द्वारा लागू किए गए बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टर नंबर प्लेट जैसे नियमों का किसान और आढ़ती विरोध कर रहे हैं। 
नए नियम क्या हैं?
रबी सीजन 2026 के दौरान मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए नए मंडी बोर्ड ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दावा है कि इन नियमों से फसल खरीद में फर्जीवाड़ा रुकेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

मोबाइल ऐप से गेट पास: गेट पास अब केवल मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जारी होगा, जिसमें वाहन का विवरण और फोटो अपलोड करना जरूरी है।

ट्रैक्टर नंबर प्लेट अनिवार्य: मंडी में फसल लेकर आने वाले हर वाहन (ट्रैक्टर) पर फ्रंट नंबर प्लेट स्पष्ट रूप से होनी चाहिए। गेट पास जारी करने के लिए वाहन की फोटो और नंबर अनिवार्य है।

“मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पर पंजीकरण: किसानों को फसल बेचने से पहले इस पोर्टल पर अपनी फसल का पूरा विवरण दर्ज करना होगा।

बायोमेट्रिक सत्यापन: नीलामी और फसल उठान के समय किसान या उसके परिवार के अधिकृत सदस्य का बायोमेट्रिक (आधार फिंगरप्रिंट) सत्यापन अनिवार्य होगा।

तीन परिवार सदस्यों को अनुमति: जिस किसान के नाम फसल पंजीकृत है, वह अपने परिवार के तीन सदस्यों की मदद से फसल बेच सकता है।

जियो फेंसिंग: मंडी परिसर में जियो फेंसिंग लागू की गई है, ताकि सभी प्रक्रियाएं मंडी के अंदर ही पूरी हों और बाहर की गतिविधियां रोकी जा सकें।

किसानों और आढ़तियों का विरोध
नए नियमों को लेकर हरियाणा के किसानों में काफी असमंजस और नाराजगी है। अधिकांश किसान अपनी फसल एक से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में या पड़ोसियों के वाहनों से लाते हैं। हर बार बायोमेट्रिक सत्यापन, फोटो अपलोड और ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना बेहद परेशानी भरा साबित हो रहा है। 
 
कई मंडियों में किसान बायोमेट्रिक व्यवस्था का विरोध करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। जुलना, पाबड़ा, अलेवा सहित कई मंडियों में किसानों ने नए नियम तोड़कर ट्रैक्टरों की एंट्री कराई और विरोध जताया। 

किसान नेता सुरेश कोथ ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि खरीद में धांधली सरकारी अफसरों, मंडी कर्मचारियों और व्यापारियों की मिलीभगत से होती है, लेकिन सरकार बायोमेट्रिक जैसे नए नए नियम किसानों पर थोप रही है जो कतई मंजूर नहीं हैं। 
आशंका जताई जा रही है कि बड़े स्तर पर बायोमेट्रिक डेटा एकत्र करने से साइबर फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। कई जगहों पर ई-खरीद पोर्टल और बायोमेट्रिक सिस्टम सुचारु न होने से भी दिक्कतें आ रही हैं। 
 
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हमला

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “मंडियों में खरीद शुरू तो हुई है लेकिन, किसान को परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। ट्रैक्टर पर बड़ी नंबर प्लेट, बायोमेट्रिक, गेट पास, तीन गारंटर जैसी ऐसी-ऐसी शर्तें लगाई जा रही है कि किसान परेशान होकर मंडी के बाहर ही फसल बेचकर चला जाए।” 
 
हुड्डा ने आरोप लगाया कि बीजेपी हर बार किसानों को परेशान करने का नया तरीका ढूंढ लेती है। बायोमेट्रिक जैसे नियमों ने मंडियों को 'हाई सिक्योरिटी जेल' में बदल दिया है। हरियाणा सरकार किसान को कैदी बनाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस विधायक प्रदेश की विभिन्न मंडियों का दौरा कर जमीनी हकीकत देखेंगे।