ईरान को चीनी का निर्यात करने की अनुमति चाहते हैं निर्यातक

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (एआईएसटीए) का कहना है कि भारत ने इस सीजन में लगभग 60 लाख टन चीनी निर्यात की है। जबकि ईरान को चीनी निर्यात नहीं हुई है। भारत के लिए ईरान लगभग 12 लाख टन चीनी के निर्यात का संभावित बाजार है। इसलिए सरकार द्वारा निर्यातकों को ईरान के लिए चीनी निर्यात की इजाजत देनी चाहिए

लखनऊ

घरेलू चीनी व्यापारियों ने मांग की है कि ईरान के लिए चीनी निर्यात की अनुमति दी जानी चाहिए। इस कदम से वह अपने निर्यात बाजार का विस्तार करने का मौका हासिल कर सकेंगे। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (एआईएसटीए)  के अनुसार भारत ने ईरान को चीनी निर्यात किए बिना ही इस सीजन में लगभग 60 लाख टन चीनी निर्यात की है। वहीं एक अनुमान के मुताबिक ईरान में लगभग 12 लाख टन चीनी  खरीदने की बाजार क्षमता है ।

आल इंडिया शुगर ट्रेड एशोसियन के (एआईएसटीए) अध्यक्ष प्रफुल्ल विठलानी ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट में बदलती राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार ईरान को चीनी निर्यात करने के लिए कोई  न कोई उपाय खोजना ही समझदारी होगी ।

इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगले सीजन के लिए सही योजना बनाकर चीनी निर्यात के लिए समय से घोषणा करने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने ने कहा कि पिछले साल के किए गये कई निर्यात की सब्सिडी का अभी तक  निपटारा नहीं किया गया है। जिसका जल्द से जल्द निपटारा किया जाय क्योंकि अगले सीजन में चीनी मिलों को शुरू करने के लिए के लिए धन की जरूरत होगी ।

एआईएसटीए का कहना है कि समुद्री माल ढुलाई भाड़े में अधिक वृद्धि और कंटेनरों की अनुपलब्धता ने निर्यात करने वालों के लिए मार्जिन को कम कर दिया है जो निर्यात में एक अड़चन साबित हो रहा है। साल  2020-21 योजना के तहत 60 लाख टन निर्यात अधिकतम स्वीकार्य निर्यात कोटा (एमएईक्यू) अनुबंध किया गया था। इसके तहत जनवरी से लेकर 5 अगस्त 2021 तक  50 लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात  किया जा चुका है।

मौजूदा सीजन में भारतीय चीनी निर्यात 33 प्रतिशत इंडोनेशिया को किया गया है जो लगभग 17 लाख टन रहा। इसके बाद क्रमशः 12 प्रतिशत और 9 प्रतिशत के साथ अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात हैं। इसके आलावा प्रमुख रूप से जिन देशों को चीनी की निर्यात किया गया है उनमें श्रीलंका, सोमालिया,सऊदी अरब, बांग्लादेश, जिबूती, इराक, मलयेशिया, सूडान, यमन, तंजानिया, चीन आदि शामिल हैं।

पहले की प्रक्रिया के तहत किया जो  चीनी निर्यात की गई उस चीनी का मूल्य लगभग 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानि लगभग 18,600 करोड़ रुपये से अधिक है। जो देश की निर्यात आय में बड़ा योगदान है इसके साथ ही कोरोना महामारी साल में गन्ना किसानों के भुगतान करने के लिए और चीनी मिलों की आय़  में बढोत्तरी होगी जिससे आगे सीजन में शुगर मिलों को आसानी  से चलाने में मदद  होगी।

एआईएसटीए के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का दाम 10 जुलाई, 2021 के 17.28 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 11 अगस्त, 2021 को 19.59 सेंट प्रति पाउंड हो गया, जो लगभग 13.4 प्रतिशत की वृद्धि है। दुनिया में  चीनी की कीमतों में  यह वृद्धि ब्राजील में खराब मौसम  के कारण हुई है।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक चालू सीजन 2020-21 के लिए अनुमानित चीनी उत्पादन 309 लाख टन, जिसमें  इस सीजन के दौरान 260 लाख टन की घरेलू बिक्री और 70 लाख टन के निर्यात की उम्मीद है।

 ( वीरेंद्र सिंह रावत, लखनऊ में कार्यरत जर्नलिस्ट हैं। वह इकोनॉमी, बजट, एग्रीकल्चर और समसामयिक विषयों पर लिखते हैं )