देश के करोड़ों गन्ना किसानों की आजीविका जिस चीनी उद्योग पर निर्भर है, उसके सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। गन्ने की पैदावार और उत्पादन में गिरावट के चलते इस साल फरवरी में ही देश की 248 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है। गन्ना पैदावार में गिरावट के कारण चीनी मिलों के लिए पर्याप्त आपूर्ति जुटाना मुश्किल हो गया है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रिज (एनएफसीएसएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, चालू चीनी सीजन 2025-26 के दौरान देशभर में कुल 536 चीनी मिलों ने पेराई शुरू की थी। फरवरी के अंत तक इनमें से 248 चीनी मिलों ने पेराई कार्य बंद कर दिया है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 186 चीनी मिलों ने पेराई बंद की थी।
गौरतलब है कि पिछले साल गन्ने की फसल पर रोगों के प्रकोप और मौसम की मार के चलते चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ था।
एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी तक देश में कुल 246 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जो गत वर्ष की समान अवधि में हुए 220 लाख टन उत्पादन से 26 लाख टन अधिक है।
उद्योग सूत्रों से रूरल वॉयस को मिली जानकारी के मुताबिक इस साल चीनी मिलों के जल्द बंद होने के कारण सीजन के अंत तक कुल चीनी उत्पादन लगभग 290 लाख टन तक पहुंचने की संभावना भी काफी कम है।
निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने वर्ष 2025-26 में कुल 324 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है, जिसमें से करीब 31 लाख टन चीनी का डायवर्जन एथेनॉल उत्पादन के लिए होगा। इसके बाद नेट शुगर प्रोडक्शन 293 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 261 लाख टन नेट उत्पादन से करीब 12 प्रतिशत अधिक है। इस्मा ने सीजन की शुरुआत में 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था।
इस प्रकार, देश में करीब 283 लाख टन चीनी की घरेलू खपत और 7 लाख टन निर्यात कोटे के बाद चालू साल के उत्पादन के आधार पर सरप्लस स्टॉक नहीं बचेगा। चालू सीजन की शुरुआत में पिछले साल के बकाया लगभग 50 लाख टन के स्तर पर ही आगामी सीजन का ओपनिंग स्टॉक से होने का अनुमान है।
यूपी में घटी गन्ना पैदावार
उत्तर प्रदेश में गन्ने की उपज शुरुआती अनुमानों से कम रही है। गन्ने की लोकप्रिय किस्म सीओ-0238 के रोगग्रस्त होने के बाद किसानों को समय पर वैकल्पिक किस्में नहीं मिल पाने से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
यूपी की चीनी मिलों ने 28 फरवरी तक 737 लाख टन गन्ने की पेराई की, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 30 लाख टन कम है।
हालांकि, यूपी में चीनी की रिकवरी पिछले सीजन के 9.45 प्रतिशत की तुलना में इस साल बढ़कर 10.05 प्रतिशत रही है। 28 फरवरी तक प्रदेश में लगभग 74 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि में हुए 72 लाख टन से थोड़ा अधिक है।
यूपी की 120 में से 18 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है और कई मिलें मार्च के मध्य तक सीजन समाप्त करने की घोषणा कर सकती हैं। राज्य में कुल चीनी उत्पादन पिछले साल के बराबर लगभग 92 लाख टन रहने का अनुमान है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक की स्थिति
महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में भी पैदावार शुरुआती अनुमानों से कम रही है। यह कमी रोग और मौसम की प्रतिकूलता, खासकर समय से पहले फूल आने (अर्ली फ्लावरिंग) के कारण देखी गई है।
28 फरवरी तक महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन 95 लाख टन तक पहुंचा है, जो पिछले साल इसी समय तक करीब 75 लाख टन था। महाराष्ट्र की 210 में से 130 चीनी मिलें पेराई बंद कर चुकी हैं। राज्य का कुल चीनी उत्पादन 106 लाख टन तक पहुंचने के आसार हैं।
कर्नाटक में चीनी उत्पादन 44 लाख टन तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल इसी अवधि में 38 लाख टन था। कर्नाटक की 81 में से 60 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। सीजन के अंत तक यहां 48 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है।
एथेनॉल और निर्यात के मोर्चे पर मुश्किलें
चीनी मिलों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में शुरू किए गए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में उनकी हिस्सेदारी घटती दिख रही है। इस्मा ने चालू सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए शुगर डायवर्जन के अनुमान को 35 लाख टन से घटाकर 31 लाख टन कर दिया है।
निर्यात के मोर्चे पर भी हालात अनुकूल नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम कम होने के कारण निर्यात चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन सीजन के अंत तक लगभग 7 लाख टन ही निर्यात हो पाने की उम्मीद है।