वैश्विक खाद्य तेल बाजार संरचनात्मक अस्थिरता के चरण में: आईवीपीए अध्यक्ष

देसाई ने बताया कि खाद्य तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर–सितंबर) में घरेलू उत्पादन 9.6 मिलियन टन अनुमानित है, जो भारत की जरूरतों का केवल 40 प्रतिशत है। इससे लगभग 16.7 मिलियन टन आयात पर भारत की निर्भरता बनी रहेगी। इस आयात में 8–8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5–5.5 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 2.8–3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल और लगभग 200,000 टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है

वैश्विक खाद्य तेल बाज़ार व्यापारिक पुनर्गठन, बायोफ्यूल अनिवार्यताओं और आपूर्ति की में कमी के कारण संरचनात्मक अस्थिरता के एक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह बात इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के अध्यक्ष एवं एमामी एग्रोटेक लिमिटेड के सीईओ सुधाकर देसाई ने कुआलालंपुर में आयोजित 'UOB काय हियान कॉन्फ्रेंस' को संबोधित करते हुए कही।

“वैश्विक खाद्य तेलों में संरचनात्मक बदलाव: भारत के लिए निहितार्थ” विषय पर बोलते हुए देसाई ने कहा कि भू-राजनीतिक बदलाव ने वैश्विक कारोबार के साझेदारों को बदल दिया है, जिससे आर्बिट्राज के अवसर कम हो गए हैं और ऊर्जा की कीमतों, मुद्रा के उतार-चढ़ाव और नीतिगत झटकों का असर खाद्य तेल बाजारों पर अधिक बढ़ गया है। ड्यूटी या व्यापार प्रवाह में छोटे बदलाव भी अब पूरी सप्लाई चेन में कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा कर रहे हैं।"

वैश्विक और घरेलू परिदृश्य वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए  देसाई ने कहा कि 2025-26 में चार प्रमुख वनस्पति तेलों का उत्पादन 208.4 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल मामूली वृद्धि है। जहां पाम और रेपसीड तेल का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं सूरजमुखी तेल का उत्पादन सीमित बना हुआ है।

बायोफ्यूल मैंडेट एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है। अकेले इंडोनेशिया का बायोडीजल कार्यक्रम लगभग 14 मिलियन टन पाम तेल की खपत करता है, जबकि अमेरिकी बायोफ्यूल नीतियां सोयाबीन तेल की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।

देसाई ने कहा, "खाद्य तेल अब शुद्ध खाद्य वस्तुओं के बजाय ऊर्जा से जुड़े रणनीतिक इनपुट के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे कीमतों का आधार (price floor) बढ़ गया है।"

भारत के संदर्भ में देसाई ने बताया कि खाद्य तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर–सितंबर) में घरेलू उत्पादन 9.6 मिलियन टन अनुमानित है, जो भारत की जरूरतों का केवल 40 प्रतिशत है। इससे लगभग 16.7 मिलियन टन आयात पर भारत की निर्भरता बनी रहेगी। इस आयात में 8–8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5–5.5 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 2.8–3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल और लगभग 200,000 टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पाम तेल का आयात 2021-22 के 10 मिलियन टन से घटकर लगभग 8 मिलियन टन रह गया है, क्योंकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल से मिल रही प्रतिस्पर्धा ने बाजार की हिस्सेदारी बदल दी है।

भारत के बारे में चर्चा करते हुए देसाई ने कहा कि तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में घरेलू खाद्य तेल उत्पादन 9.6 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो भारतीय जरूरतों का केवल 40 प्रतिशत ही पूरा करता है। यह लगभग 16.7 मिलियन टन आयात पर भारत की संरचनात्मक निर्भरता को और पुख्ता करता है। आयात में 8–8.5 मिलियन टन पाम तेल, 5–5.5 मिलियन टन सोयाबीन तेल, 2.8–3 मिलियन टन सूरजमुखी तेल और लगभग 200,000 टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें नेपाल के रास्ते आने वाला शून्य-शुल्क आयात भी शामिल है।

भारत का आयात बास्केट तेलों के बीच मूल्य अंतर, विशेषकर पाम और सोयाबीन तेल के बीच, के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। उन्होंने कहा, "कीमतों के अंतर में 50–60 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का बदलाव भी बड़े पैमाने पर मात्रा (वॉल्यूम) को एक तेल से दूसरे तेल में स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त है।" पाम तेल का आयात 2021-22 के 10 मिलियन टन से गिरकर लगभग 8 मिलियन टन रह गया है, क्योंकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा ने बाजार हिस्सेदारी के समीकरण बदल दिए हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिफाइनिंग मार्जिन दबाव में बना हुआ है, जिससे मांग की गति सीमित हो रही है।

व्यापार नीति पर देसाई ने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और साफ्टा (SAFTA) सदस्यों जैसे भागीदारों के साथ हाल ही में किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) और द्विपक्षीय व्यवस्थाएं अब बाजार मूल्य निर्धारण और सोर्सिंग निर्णयों का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं।

उन्होंने कहा, "ये समझौते अब सीधे तौर पर लैंडेड कॉस्ट स्ट्रक्चर, आर्बिट्राज फ्लो और रिफाइनिंग इकोनॉमिक्स को प्रभावित करते हैं।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी सोयाबीन तेल के लिए संभावित टैरिफ रियायतों या कोटा तंत्र पर अधिक विवरण मिलने से बाजार में और स्पष्टता आएगी।

अपना मूल्य दृष्टिकोण साझा करते हुए, देसाई ने मलेशिया का पाम तेल उत्पादन 19.9 मिलियन टन (पिछले वर्ष 20.2 मिलियन टन) और इंडोनेशिया का 51.8 मिलियन टन (पिछले वर्ष 51.2 मिलियन टन) रहने का अनुमान लगाया, क्योंकि दोनों देशों में पुनर्रोपण (replanting) की प्रगति धीमी है। निकट अवधि में आपूर्ति की तंगी मार्च 2026 तक कीमतों को समर्थन दे सकती है। हालांकि, सोयाबीन तेल पर बने रहने वाले प्रीमियम के कारण भारत में पाम और सूरजमुखी तेल की खपत सीमित रहने की संभावना है।

उन्हें उम्मीद है कि BMD (बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स) की कीमतें एक सीमित दायरे में रहेंगी लेकिन नीति-संचालित होंगी। अप्रैल-जून के दौरान व्यापार 4,000–4,400 की सीमा में और जुलाई-सितंबर में 4,200–4,600 की सीमा में रहने का अनुमान है। सूरजमुखी तेल की कीमतें अगले उत्पादन चक्र तक ऊंची रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि ऐसे बाजार में जो पारंपरिक आपूर्ति चक्रों के बजाय नीतिगत झटकों से अधिक संचालित है, उपभोक्ताओं तक कीमतों के अनचाहे हस्तांतरण को रोकने के लिए स्थिर और पूर्वानुमानित शुल्क ढांचा महत्वपूर्ण है। उन्होंने खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्माताओं और वैश्विक हितधारकों के साथ आईवीपीए के निरंतर जुड़ाव को दोहराया।