देश में खाद्य तेलों की बढ़ती आयात निर्भरता और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद यदि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ता है तो इससे तिलहन किसानों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि, इससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ने की आशंका है।
खाद्य तेल उद्योग के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत ने 166.51 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया, जो पिछले वर्ष के 161.82 लाख टन आयात की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत अधिक है। खाद्य तेलों के आयात में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट के बावजूद दर्ज की गई है।
खाद्य तेल के आयात में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण SAFTA के तहत नेपाल से खाद्य तेलों के आयात में तेज वृद्धि है। SAFTA के तहत नेपाल से भारत को जीरो-ड्यूटी पर रिफाइंड खाद्य तेलों का निर्यात होता है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान नेपाल ने भारत को 7.36 लाख टन खाद्य तेलों का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा केवल 3.45 लाख टन था। इस तरह नेपाल से भारत को खाद्य तेलों का निर्यात दोगुने से भी अधिक हो गया है। इसमें रिफाइंड सोयाबीन तेल का बड़ा हिस्सा है, जबकि सूरजमुखी तेल, RBD पामोलिन और रेपसीड तेल की भी कुछ मात्रा शामिल है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल पाम ऑयल युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 12 प्रतिशत महंगा हो चुका है। प्रमुख पाम ऑयल निर्यातक देश इंडोनेशिया और मलेशिया ऊर्जा लागत बढ़ने के असर को कम करने के लिए बायोफ्यूल उत्पादन बढ़ा रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
भारत सरकार ने पिछले वर्ष घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने और प्रोसेसिंग उद्योग को राहत देने के लिए कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर मूल आयात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। अब आयात शुल्क में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता लाने के तमाम दावों के बावजूद देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाना चुनौती बना हुआ है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद्य तेल की खपत कम करने की अपील की है। घरेलू खपत में कमी और तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी के जरिए ही खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। खाद्य तेलों के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होने के कारण अरबों रुपये देश से बाहर जा रहे हैं, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसके चलते आयात और महंगा होता जा रहा है।