ट्रैक्टर उद्योग की रफ्तार पड़ सकती है धीमी, ICRA ने 1-4% वृद्धि का अनुमान जताया

भारत के ट्रैक्टर उद्योग में पिछले साल 23.5% की मजबूत वृद्धि के बाद इस साल मांग वृद्धि धीमी पड़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने FY27 में घरेलू थोक बिक्री में बढ़ोतरी घटकर 1-4% रहने का अनुमान लगाया है। ऊंचे आधार प्रभाव और कमजोर मानसून का असर ट्रैक्टरों की बिक्री पर दिख सकता है।

भारत के ट्रैक्टर उद्योग में चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान मांग वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ICRA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में मजबूत वृद्धि के बावजूद ऊंचे आधार प्रभाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितताएं आने वाले महीनों में मांग को प्रभावित कर सकती हैं।

ICRA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक्टरों की घरेलू थोक बिक्री में वृद्धि FY27 के दौरान घटकर केवल 1-4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि FY26 में उद्योग ने 23.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी।

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत ट्रैक्टर उद्योग के लिए काफी मजबूत रही है। जुलाई 2026 में घरेलू ट्रैक्टर थोक बिक्री सालाना आधार पर 20.1 प्रतिशत बढ़ी, जबकि खुदरा बिक्री में 28.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस मजबूत शुरुआत के पीछे अपेक्षाकृत कम आधार प्रभाव, कृषि क्षेत्र में मजबूत नकदी प्रवाह और ट्रैक्टरों पर GST दरों में कटौती के बाद उनकी बेहतर वहनीयता को प्रमुख वजह माना गया है।

ऊंचा आधार और कमजोर मानसून 

चालू वित्त वर्ष (FY27) में अप्रैल-जुलाई के दौरान ट्रैक्टरों की थोक बिक्री में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, FY26 के ऊंचे आधार प्रभाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते FY27 के शेष महीनों में वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने की उम्मीद है। कमजोर मानसून की स्थिति कृषि गतिविधियों और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर डाल सकती है, जिसका सीधा प्रभाव ट्रैक्टर खरीद पर पड़ सकता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पहले चरण के दीर्घावधि मानसून पूर्वानुमान के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव के चलते वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90 प्रतिशत ± 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

हालांकि, मानसून की शुरुआत कमजोर रहने के बावजूद बाद के महीनों में बारिश की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 28 अगस्त तक देश में संचयी वर्षा की कमी घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गई, जो जून के अंत में करीब 30 प्रतिशत थी। देश के कई क्षेत्रों में बेहतर बारिश से जलाशयों के स्तर में भी सुधार हुआ है, जिससे कृषि क्षेत्र पर कमजोर मानसून के संभावित असर में कुछ हद तक कमी आई है।

इस दौरान खरीफ फसलों की बुवाई में भी तेज सुधार देखा गया है। 28 अगस्त तक खरीफ फसलों का बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में केवल 1.73 प्रतिशत कम था, जबकि जून के अंत में इसमें सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

इसके बावजूद, सामान्य से कम मानसून और कुछ फसलों के रकबे में कमी ग्रामीण आय और ट्रैक्टर मांग के लिए जोखिम बनी हुई है। मानसून की आगे की प्रगति और खरीफ उत्पादन FY27 में ट्रैक्टर उद्योग की मांग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बुनियादी स्थिति मजबूत

ट्रैक्टर उद्योग के लिए कृषि क्षेत्र की बुनियादी स्थिति अभी भी सहायक बनी हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा मार्च 2026 में जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में खरीफ और रबी दोनों मौसमों के खाद्यान्न उत्पादन में 3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई।

किसानों को मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सरकारी सब्सिडी योजनाएं और ट्रैक्टरों की बेहतर वहनीयता ग्रामीण मांग को सहारा देती रहेंगी। ये कारक मानसून से उत्पन्न संभावित दबाव के बावजूद ट्रैक्टर बिक्री में किसी बड़ी गिरावट को रोकने में मदद कर सकते हैं।

ट्रैक्टर कंपनियों की वित्तीय स्थिति

ICRA के अनुसार, FY27 के बाकी महीनों में बिक्री वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने के बावजूद ट्रैक्टर कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

ऑपरेटिंग लीवरेज और कच्चे माल की अपेक्षाकृत स्थिर लागत से कंपनियों के लाभ मार्जिन को समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, मजबूत लाभप्रदता, कम कर्ज और पर्याप्त तरलता के कारण ट्रैक्टर मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) की क्रेडिट प्रोफाइल भी आरामदायक बनी रहने की संभावना है।