हैदराबाद के विज्ञान ज्योति इंस्टीट्यूट और IIMR ने विकसित किया मिलेट रोटी मेकर, पेटेंट भी मिला

VNR VJIET और ICAR-IIMR के शोधकर्ताओं ने मिलेट की रोटियां बनाने वाली स्वचालित मशीन के लिए औद्योगिक डिजाइन का पेटेंट हासिल किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए IIMR के NUTRI-Hub से 3 लाख रुपये की मदद दी गई थी।

हैदराबाद स्थित विज्ञान ज्योति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (VNR VJIET) के शोधकर्ताओं ने भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान (IIMR) के सहयोग से खास तौर पर मिलेट से रोटियां बनाने के लिए विकसित स्वदेशी स्वचालित मशीन का औद्योगिक डिजाइन पेटेंट हासिल किया है।

इस मशीन से मिलेट का आटा तैयार करने और रोटी बनाने में लगने वाला समय और मेहनत, दोनों कम हो जाता है। स्वस्थ खान-पान को लेकर बढ़ती उपभोक्ता रुचि के बीच शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मशीन भारतीय घरों में मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों को अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनाने में मदद कर सकती है।

इस परियोजना को IIMR के इनक्यूबेशन हब NUTRI-Hub ने प्रोटोटाइप और डिजाइन विकास के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी है। इस सहयोग में VNR VJIET की इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता को IIMR के मिलेट और खाद्य अनुसंधान संबंधी विशेष ज्ञान के साथ जोड़ा गया है।

इस शोध के तहत तीन पेटेंट आवेदन किए गए हैं, जिनमें से दो को अब तक मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 2026 में मिला नवीनतम औद्योगिक डिजाइन पेटेंट भी शामिल है। VNR VJIET के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख और प्रमुख शोधकर्ता प्रणवानंद सत्यमूर्ति के नेतृत्व में टीम ऐसी मशीन विकसित कर रही है जो मिलेट के आटे और रोटी बनाने के प्रमुख चरणों को स्वचालित कर सके।

40,000 रुपये लागत का लक्ष्य

परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य मौजूदा स्वचालित रोटी बनाने वाली मशीनों की तुलना में अधिक किफायती विकल्प तैयार करना है। शोधकर्ता मशीन की लागत करीब 40,000 रुपये रखने का लक्ष्य बना रहे हैं। यह बाजार में उपलब्ध मशीनों की लगभग 1.5 लाख रुपये की कीमत से करीब 60 प्रतिशत सस्ती होगी।

ऐसी मशीन की जरूरत मिलेट के आटे की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए पैदा हुई है। गेहूं के आटे की तुलना में मिलेट का आटा संभालना अधिक कठिन होता है। वांछित बनावट हासिल करने के लिए अधिक दबाव तथा बार-बार थपथपाने की जरूरत होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रत्येक रोटी के लिए इस प्रक्रिया को करीब 50 बार दोहराना पड़ सकता है, जिससे यह काम श्रमसाध्य हो जाता है।

प्रस्तावित स्वचालित प्रणाली का उद्देश्य पोषण संबंधी लाभों को बरकरार रखते हुए इस शारीरिक मेहनत को कम करना है। प्रोटोटाइप को आटा तैयार करने और रोटी बनाने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें एकरूपता, सुविधा और इस्तेमाल में आसानी पर जोर दिया गया है।

प्रणवानंद सत्यमूर्ति ने कहा कि IIMR के साथ सहयोग का उद्देश्य मिलेट के आटे से जुड़ी चुनौतियों को इंजीनियरिंग समाधान में बदलना है। उन्होंने इस तकनीक को एक ऐसी सक्षम प्रणाली बताया, जो मिलेट को रोजमर्रा के आहार में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है।

शोध से व्यावसायीकरण की ओर

VNR VJIET ने तकनीक के प्रयोग, डिजाइन, परीक्षण और सुधार के लिए शोध टीम को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि घर पर मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ तैयार करने की कठिनाई को कम करने से इनके व्यापक उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर ऐसे उपभोक्ताओं के बीच जो स्वस्थ और सुविधाजनक खान-पान विकल्प तलाश रहे हैं।