बजट में कोऑपरेटिव को टैक्स बेनिफिट, एनसीईएल को 450 करोड़ की ग्रांट

केंद्रीय बजट 2026–27 में सहकारिता क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन दिया गया है। सहकारी समितियों को लाभांश पर कर कटौती की सुविधा मिलने से किसानों और सदस्यों की आय टैक्स फ्री होगी। वहीं कृषि निर्यात को मजबूत करने के लिए नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) को 450 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026–27 सहकारिता क्षेत्र के लिए कई फायदे लेकर आया है। एक ओर जहां सहकारी संस्थाओं को लाभांश पर कटौती (डिडक्शन) की सुविधा देकर किसानों और सहकारी सदस्यों को आर्थिक लाभ का रास्ता खोला गया है, वहीं सहकारी कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) को 450 करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है, जो उसे प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी।

बजट घोषणा के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र के लिए कई टैक्स रियायतों का ऐलान किया गया है। अब पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों को भी कटौती (डिडक्शन) का लाभ मिलेगा, बशर्ते यह आपूर्ति सरकारी संगठनों या फेडरल कोऑपरेटिव को की जाए।

नई कर व्यवस्था के तहत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय (Inter-Cooperative Society Dividend Income) यानी एक सहकारी समिति से अन्य सहकारी समिति को दिए जाने वाले लाभांश को भी कटौती के रूप में मान्य किया जाएगा, बशर्ते इसे आगे सदस्यों में वितरित किया जाए।

अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी महासंघ (National Cooperative Federation) को किसी कंपनी में किए गए निवेश से प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्षों के लिए टैक्स छूट दी जाएगी। यह छूट 31 जनवरी 2026 तक हुए निवेश पर मिलेगी और सहकारी समितियों में वितरित किए गए लाभांश पर ही मान्य होगी।

इस टैक्स रियायतों से सहकारी क्षेत्र को फायदा पहुंचेगा, क्योंकि किसानों के हाथ में जाने वाला पैसा टैक्स फ्री रहेगा। इसके साथ ही डिडक्शन की व्यवस्था लागू होने के बाद सहकारी समितियों को अपने मुनाफे पर कम टैक्स देना होगा। अभी तक सहकारी समितियों और संस्थानों को अपने लाभ से लाभांश देना पड़ता था, लेकिन नए वित्त वर्ष से उन्हें ऐसा नहीं करना होगा। सरकार का यह कदम सहकारी क्षेत्र को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ सहकारिता के विस्तार में भी सहायक साबित होगा।

सहकारी क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक किसानों और सदस्यों से अर्जित मुनाफा एक तरह से उनकी ही कमाई है, जो उनके उत्पादन और कारोबार से ही प्राप्त होती है। ऐसे में इसे कृषि आय के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार ने इसी तर्क को स्वीकार करते हुए यह कर छूट प्रदान की है।

बजट में सहकारिता क्षेत्र के लिए दूसरी बड़ी घोषणा एनसीईएल को 450 करोड़ रुपये की ग्रांट-इन-एड देने की है। इसका उद्देश्य एनसीईएल को एक निर्यातक के रूप में प्रतिस्पर्धी बनाना है। सरकार द्वारा स्थापित तीन नई सहकारी संस्थाओं में एनसीईएल की स्थापना किसानों को कृषि निर्यात का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए की गई है। ऐसे में उसे पहले से मौजूद निर्यात कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने एनसीईएल को वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।

सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि कृषि निर्यात में बड़े घरेलू व्यापारियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुकाबले एनसीईएल को सरकार की आर्थिक मदद मिलने से किसानों को सीधा लाभ होगा। देश भर की किसान सहकारी समितियां इसकी सदस्य बन रही हैं, जिससे निर्यात से होने वाली आय का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सकेगा।