प्रमुख डेयरी उत्पादक क्षेत्रों में दूध उत्पादन में तेज वृद्धि के चलते वैश्विक स्तर पर डेयरी उत्पादों की कीमतों में गिरावट आई है। अधिक आपूर्ति ने मक्खन और चीज जैसे प्रमुख उत्पादों की कीमतों पर गहरा असर डाला है। यूरोप में इसका प्रभाव विशेष रूप से स्पष्ट रहा है। इसके अलावा डेयरी सेक्टर में कई ढांचागत बदलाव भी हो रहे हैं। मसलन, सऊदी अरब डेयरी में आत्मनिर्भर बनने के साथ अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पादन करने लगा है।
यूरोप के बाजारों में मक्खन की कीमतें घटकर लगभग 4,000 यूरो प्रति टन रह गई हैं, जबकि वर्ष की शुरुआत में इसमें तेजी देखने को मिली थी। चीज के दाम भी 100 यूरो प्रति टन घटकर 3,550 यूरो पर आ गए हैं। हालांकि स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) और होल मिल्क पाउडर (WMP) की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
आपूर्ति में यह बढ़ोतरी कई कारणों से है। इनमें बेहतर उत्पादन दक्षता, अनुकूल मौसम परिस्थितियां और आधुनिक डेयरी तकनीक का बढ़ता उपयोग शामिल हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में मांग उस गति से नहीं बढ़ पाई, जिसके चलते अतिरिक्त स्टॉक जमा हो गया और कीमतों में गिरावट आई।
यूरोपीय डेयरी सहकारी समितियां इस स्थिति से निपटने के लिए अलग-अलग रणनीति अपना रही हैं। कुछ संस्थाएं किसानों को समर्थन देने के लिए दूध खरीद कीमत बढ़ा रही हैं, जबकि अन्य अनिश्चित बाजार परिस्थितियों के बीच सतर्क रुख बनाए हुए हैं। मक्खन और चीज के बढ़ते भंडार के बीच अब ध्यान उत्पादन के प्रबंधन और लागत घटाने पर केंद्रित हो गया है।
डेयरी न्यूज टुडे ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वैश्विक स्तर पर इन बदलावों का असर भारत सहित अन्य बाजारों पर भी पड़ रहा है। यूरोप में मक्खन की कम कीमतें दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व जैसे निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रही हैं। वहीं, मिल्क पाउडर की स्थिर कीमतें भारतीय प्रोसेसरों को आयातित महंगाई से बचाने में मदद कर रही हैं।
डेयरी के मामले में सऊदी अरब हुआ आत्मनिर्भर
कुछ देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब ने डेयरी उत्पादन में 130% से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। अर्थात वह अपनी जरूरत से अधिक उत्पादन करने लगा है। यह खाद्य सुरक्षा में किए गए उसके बड़े निवेश को दर्शाता है। यह रुझान स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की व्यापक दिशा को भी उजागर करता है।
दूध दुहने में एआई का प्रयोग
उतार-चढ़ाव से आगे बढ़ते हुए, डेयरी उद्योग नवाचार और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के चलते बड़े बदलाव के दौर से भी गुजर रहा है। 2026 में ध्यान अब विश्वसनीयता, गुणवत्ता और स्थिरता पर केंद्रित हो गया है। एआई आधारित दूध दुहने की प्रणाली, पशुओं के स्वास्थ्य की रियल-टाइम निगरानी और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी तकनीकी प्रगति आधुनिक डेयरी संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। ये तकनीकें उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और श्रम पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही हैं।
इन सबके साथ हाई-प्रोटीन डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है, खासकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और संस्थागत बाजारों में। नई प्रोसेसिंग तकनीक की मदद से दही, चीज और पनीर जैसे उत्पादों में बिना स्वाद से समझौता किए प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा रही है।
प्रिसिजन फर्मेंटेशन जैसी उभरती तकनीक भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। लैब में तैयार डेयरी प्रोटीन पारंपरिक डेयरी के पूरक के रूप में उभर रहे हैं। इसके अलावा, प्रोबायोटिक पेय और फोर्टिफाइड दूध उत्पाद जैसे फंक्शनल डेयरी पेय स्वास्थ्य लाभों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पैकेजिंग और सुविधा में हो रहे नवाचार इस रुझान को और गति दे रहे हैं।
ट्रेसेबिलिटी भी अब उद्योग की प्राथमिकता बन चुकी है। ब्लॉकचेन और IoT जैसी तकनीक फार्म से फैक्ट्री तक पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही हैं, जिससे खरीदारों को स्रोत और गुणवत्ता की पुष्टि करने में मदद मिल रही है।
कुल मिलाकर, 2026 में वैश्विक डेयरी उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। जहां अधिक आपूर्ति और कीमतों का दबाव तात्कालिक चुनौतियां पेश कर रहा है, वहीं दीर्घकालिक विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि उद्योग किस तरह नवाचार को अपनाता है, आपूर्ति श्रृंखला का कुशल प्रबंधन करता है और बदलती उपभोक्ता मांग के अनुसार खुद को ढालता है।