अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की जून माह की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में वैश्विक अनाज बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। गेहूं, चावल और मक्का की खपत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित है। कई प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण वैश्विक भंडार में गिरावट की आशंका जताई गई है। वहीं भारत चावल निर्यात और मक्का उत्पादन दोनों में अपनी स्थिति और मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
वैश्विक गेहूं उत्पादन घटने के आसार
यूएसडीए के अनुसार 2026-27 में वैश्विक गेहूं उत्पादन पिछले साल से कम रहेगा। रूस, तुर्किये और यूक्रेन के उत्पादन अनुमान बढ़ाए गए हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और अमेरिका के लिए अनुमान घटाए गए हैं। इसके बावजूद कुल वैश्विक गेहूं उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत कम रहने के आसार हैं। दूसरी ओर पशु आहार और अन्य उपयोगों के कारण गेहूं की खपत बढ़ने का अनुमान है।
रूस में अनुकूल वर्षा के कारण 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 8.8 करोड़ टन कर दिया गया है। हालांकि अत्यधिक वर्षा के कारण वसंतकालीन गेहूं की बुवाई प्रभावित हुई है। यूक्रेन में मई माह के अनुकूल मौसम और पर्याप्त नमी के कारण गेहूं की फसल की स्थिति सुधरी है। वहां गेहूं उत्पादन 235 लाख टन रहने का अनुमान है।
इसके विपरीत पाकिस्तान में मौसम के अंतिम चरण में आए तूफान और अधिक तापमान के कारण गेहूं उत्पादन अनुमान घटाकर 290 लाख टन कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में सूखे और मिट्टी में कम नमी के कारण गेहूं उत्पादन का अनुमान 280 लाख टन कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष से 22 प्रतिशत कम है। हालांकि तुर्किये में भरपूर वर्षा के कारण रिकॉर्ड 225 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।
भारत करेगा 245 लाख टन चावल निर्यात
चावल का वैश्विक उत्पादन पिछले वर्ष के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 1 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है, जबकि खपत बढ़ती रहेगी। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक चावल भंडार में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।
USDA के अनुसार वैश्विक चावल व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है और इसमें भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत रहने का अनुमान है। भारत के लिए चावल निर्यात अनुमान बढ़ाकर 245 लाख टन कर दिया गया है, जिसका प्रमुख कारण निर्यात योग्य सरप्लस की उपलब्धता है।
वैश्विक चावल बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। भारतीय चावल के निर्यात भाव 341 डॉलर प्रति टन पर स्थिर रहे, जबकि थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के भावों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
भारत के साथ बढ़ेगा वैश्विक मक्का उत्पादन
मक्का क्षेत्र में भी भारत का महत्व बढ़ रहा है। USDA ने वैश्विक मक्का उत्पादन अनुमान बढ़ाया है, जिसका प्रमुख कारण भारत में बड़ी फसल की संभावना है। वैश्विक मक्का व्यापार में भी वृद्धि का अनुमान है और भारत, पराग्वे तथा दक्षिण अफ्रीका के निर्यात बढ़ने की संभावना जताई गई है।
भारत के मक्का निर्यात अनुमान को 10 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार रिकॉर्ड उत्पादन के कारण भारत की निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
कुल मिलाकर USDA का आकलन बताता है कि वैश्विक खाद्यान्न बाजार में मांग की वृद्धि उत्पादन वृद्धि से अधिक तेज बनी हुई है। ऐसे में गेहूं, चावल और मक्का के भंडार पर दबाव बना रह सकता है। इस परिदृश्य में भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बना हुआ है, बल्कि मक्का उत्पादन और निर्यात में भी तेजी से उभरती हुई शक्ति के रूप में सामने आ रहा है।