ट्रंप का ऐलान- ईरान के साथ ‘खत्म’ हुआ युद्धविराम, खाड़ी में फिर बढ़ा टकराव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम का समझौता "खत्म" हो गया है। ट्रंप का यह बयान खाड़ी में अमेरिकी बेस पर ईरान के हमलों के बाद आया है।

ट्रंप का ऐलान- ईरान के साथ ‘खत्म’ हुआ युद्धविराम, खाड़ी में फिर बढ़ा टकराव

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच रातभर हुए हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान युद्धविराम के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि उनके हिसाब से यह खत्म हो चुका है और ईरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।

ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व के खिलाफ बेहद कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जहां तक उनका सवाल है, वह उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उनके मुताबिक इससे किसी नतीजे पर पहुंचने की संभावना बहुत कम है।

ट्रंप का यह बयान ईरान द्वारा खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर नए हमलों के बाद आया है। युद्धविराम खत्म होने के बयान के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर संघर्ष बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

होर्मुज में टैंकरों पर हमले

नया टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद शुरू हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि ईरान ने सीधे तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान में 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के जवाब में किए गए हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के खिलाफ किए गए हमलों का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल को निशाना बनाए जाने का जवाब देना था। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए हमलों को युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

ईरान का पलटवार

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी हमलों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल न होने दें।

ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने देश के दक्षिणी तट के पास मौजूद कई ठिकानों पर हमला किया है। ईरान ने इसे पिछले महीने हुए युद्ध समाप्ति समझौते का उल्लंघन बताते हुए इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

इस बीच, नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने अमेरिकी हमलों को आवश्यक बताया और ईरान पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया।

जून में हुआ था 14 सूत्री समझौता

अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्री समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया था। इसका उद्देश्य युद्धविराम को आगे बढ़ाना और स्थायी समझौते के लिए बातचीत का रास्ता तैयार करना था। समझौते में शुरुआती 60 दिनों की वार्ता अवधि का प्रावधान था। इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की भविष्य की व्यवस्था, अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने जैसे मुद्दों पर बातचीत होनी थी।

हालांकि, कतर में हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरानी जवाबी हमलों ने युद्धविराम के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया है। ट्रंप के युद्धविराम खत्म होने के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 78.80 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चे तेल का भाव 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति, माल ढुलाई लागत और ऊर्जा कीमतों पर व्यापक असर पड़ने की आशंका रहती है। ताजा घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है और अमेरिका-ईरान संघर्ष के नए दौर में प्रवेश करने का खतरा बढ़ा दिया है।

 

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