मध्य पूर्व में डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से जारी तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि लेबनान में लागू युद्धविराम के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को “पूरी तरह खुला” रखा जाएगा। यह कदम ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच लंबे संघर्ष के बाद क्षेत्र में स्थिरता लाने की कोशिशों के बीच उठाया गया है।
भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 55-60% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जिसमें से एक बड़ा भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। वहीं, भारत की एलपीजी मांग का लगभग 60% आयात के जरिए पूरा होता है, जिसमें से करीब 90% आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर आती है।
इस घोषणा का असर तुरंत वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा। भारतीय समय के अनुसार शाम सात बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 11% से अधिक गिरकर 87.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी, जबकि डब्लूटीआई क्रूड 12% से ज्यादा गिरकर 83.13 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह गिरावट इस उम्मीद के चलते आई कि अब तेल आपूर्ति में बाधाएं कम होंगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। युद्ध के दौरान इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया था और इतिहास के सबसे बड़े तेल झटके की आशंका जताई जा रही थी।
इस बीच, लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों का युद्धविराम फिलहाल कायम नजर आ रहा है, जिससे व्यापक शांति समझौते की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सभी पक्ष इस समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे या नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए जल्द ही कोई समझौता हो सकता है, हालांकि इसकी समयसीमा अभी तय नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कुछ उल्लंघनों की खबरें भी सामने आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, भले ही स्थिति सामान्य हो जाए, मध्य पूर्व को युद्ध से पहले के तेल उत्पादन स्तर तक लौटने में दो साल तक का समय लग सकता है। इस युद्ध के कारण मार्च में वैश्विक तेल आपूर्ति में एक करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।