अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध होरमुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों में शिपिंग गतिविधियों को बाधित कर रहा है। इससे अनाज, तिलहन और उर्वरकों का वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि प्रमुख शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के रूट बदल रही हैं, जबकि बीमा कंपनियां युद्ध-जोखिम कवर वापस ले रही हैं। इसके चलते वैश्विक कृषि सप्लाई चेन तथा व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
युद्ध ने होरमुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों में सुरक्षा जोखिम काफी बढ़ा दिया है। यह मार्ग केवल कच्चे तेल नहीं, बल्कि अनाज, तिलहन, उर्वरक और अन्य जिंसों की आवाजाही के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सैन्य गतिविधियों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की खबरों के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने अपने परिचालन की समीक्षा शुरू कर दी है। कुछ प्रमुख कंटेनर कंपनियों ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों को अस्थायी रूप से रोक दिया है या जहाजों को वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ दिया है।
जॉइंट मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMlC) ने इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा स्थिति को बढ़ाकर “क्रिटिकल” कर दिया है, जो सक्रिय सैन्य खतरों की ओर संकेत करता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी ने एक बयान में कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। यदि कोई जहाज इससे गुजरने की कोशिश करेगा तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और नौसेना के जवान उसे आग के हवाले कर देंगे।” इन घटनाक्रमों के चलते अधिक सख्त हो गया है तथा कनसाइनमेंट में देरी या रास्ता बदलने की स्थिति पैदा हो गई है।
स्वेज और होरमुज मार्ग से समुद्री कृषि व्यापार पर असर
ईरान से जुड़े तनाव का बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले अनाज और तिलहन व्यापार का लगभग 13-15 प्रतिशत तथा समुद्री मार्ग से निर्यात होने वाले उर्वरकों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा स्वेज नहर से होकर गुजरता है। वहीं होरमुज जलडमरूमध्य क्रॉप न्यूट्रिएंट्स के बड़े परिवहन का प्रमुख मार्ग है। यदि लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो मक्का, सोयाबीन, गेहूं, चीनी और पशु आहार से जुड़े उत्पादों के व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। उर्वरक आपूर्ति शृंखला भी प्रभावित हो सकती है, जबकि किसान पहले ही बढ़ी हुई लागत का सामना कर रहे हैं।
उर्वरक बाजार विशेष रूप से संवेदनशील स्थिति में है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के बड़े उर्वरक उत्पादन केंद्रों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर क्रॉप न्यूट्रिएंट्स के कारोबार का बड़ा हिस्सा होरमुज मार्ग से गुजरता है। किसी भी तरह की रुकावट से आयातक देशों में उपलब्धता घट सकती है और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
मक्का बाजार की नजर ब्राजील के निर्यात पर टिकी हुई है क्योंकि ईरान, ब्राजील के मक्का का प्रमुख खरीदार रहा है। यदि व्यापार में लंबा व्यवधान होता है, तो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मक्का निर्यातक ब्राजील के लिए आपूर्ति का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं गेहूं बाजार में भी शिपिंग जोखिमों को लेकर अनिश्चितता के बीच उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर अनिश्चितता ने सोयाबीन व्यापार की संभावनाओं पर भी असर डाला है, क्योंकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन आयातक है। लंबे समय तक भू-राजनीतिक तनाव बने रहने पर खरीद में देरी या बाधा आ सकती है।
युद्ध जोखिम बीमा पॉलिसियां अब अनिवार्य
सैन्य तनाव के बीच बीमा उद्योग ने त्वरित प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय समूह ‘प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) क्लब्स’ के कई प्रमुख बीमाकर्ताओं ने फारस की खाड़ी और आसपास के जलक्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए युद्ध जोखिम कवर वापस लेने की घोषणा की है। यह कदम पुनर्बीमाकर्ताओं (रीइंश्योरेंस) द्वारा इसी तरह की पॉलिसियां रद्द किए जाने के बाद उठाया गया है।
युद्ध जोखिम बीमा, जो सामान्य समुद्री बीमा से अलग खरीदा जाता है, उच्च खतरे वाले क्षेत्रों में जाने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य माना जाता है। प्रमुख बीमाकर्ताओं के पीछे हटने से जहाज मालिकों को अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है या सीमित कवर उपलब्ध हो सकता है। इससे अल्पावधि में नए माल लदान को लेकर हिचकिचाहट बढ़ सकती है।
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बीमा दरें निकट अवधि में 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यदि वाणिज्यिक जहाजों पर सीधे हमले बढ़ते हैं तो इसमें और तेज वृद्धि संभव है। कुछ एशियाई बीमा कंपनियों ने भी ईरान और इजरायल के आसपास के जलक्षेत्र में युद्ध जोखिम अंडरराइटिंग सीमित कर दी है।
जहाजों के मार्ग बदलने, बीमा लागत बढ़ने और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के संयुक्त प्रभाव से ऊर्जा और कृषि बाजारों में ‘वॉर प्रीमियम’ जुड़ रहा है। अब कारोबारी पारंपरिक मांग-आपूर्ति कारकों के साथ-साथ सैन्य घटनाक्रमों पर भी नजर रख रहे हैं।