वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन की ‘टॉप एग्री-फूड पायनियर्स 2026’ सूची में डॉ. यशपाल सहरावत समेत तीन भारतीय शामिल

वर्ष 2026 के TAP समूह में छह महाद्वीपों के 30 देशों से 40 वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, इनोवेटर और सामुदायिक नेता शामिल हैं। इन सभी को औपचारिक रूप से नॉर्मन ई. बोरलॉग इंटरनेशनल डायलॉग के दौरान सम्मानित किया जाएगा, जिसका आयोजन 20 से 22 अक्टूबर तक अमेरिका के आयोवा राज्य के डेस मोइन्स शहर में होगा।

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन भारतीय कृषि वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स को वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन ने वर्ष 2026 की टॉप एग्री-फूड पायनियर्स (TAP) सूची में स्थान दिया है। यह प्रतिष्ठित वार्षिक सूची उन व्यक्तियों को सम्मानित करती है जो वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की सबसे गंभीर चुनौतियों के समाधान के लिए प्रयास कर रहे हैं।

वर्ष 2026 के TAP समूह में छह महाद्वीपों के 30 देशों से 40 वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, इनोवेटर और सामुदायिक नेता शामिल हैं। इन सभी को औपचारिक रूप से नॉर्मन ई. बोरलॉग इंटरनेशनल डायलॉग के दौरान सम्मानित किया जाएगा, जिसका आयोजन 20 से 22 अक्टूबर तक अमेरिका के आयोवा राज्य के डेस मोइन्स शहर में होगा। 

इस सूची में शामिल तीन भारतीय हैं - डॉ. यशपाल सहरावत, डॉ. आनंदरामकृष्णन चिन्नास्वामी और डॉ. राजीव वार्ष्णेय। इनका योगदान टिकाऊ कृषि, खाद्य प्रौद्योगिकी, जलवायु अनुकूलन और फसल जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों में है।

डॉ. यशपाल सहरावत को मिला यह सम्मान जलवायु स्मार्ट और संसाधन कुशल कृषि प्रणालियों के विकास में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है। वर्तमान में वे इंटरनेशनल फर्टिलाइजर डेवलपमेंट सेंटर (IFDC) में वैश्विक स्तर पर रेजिलिएंस और पर्यावरण निदेशक तथा भारत स्थित फर्टिलाइजर इनोवेशन सेंटर के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। सहरावत एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हैं। उनके पास एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में टिकाऊ कृषि, जलवायु-अनुकूल उर्वरक नवाचार और मृदा स्वास्थ्य नीतियों को आगे बढ़ाने का दो दशक से अधिक का अनुभव है।

डॉ. सहरावत ने विभिन्न महाद्वीपों में ग्लोबल नेटवर्क ऑफ फर्टिलाइजर इनोवेशन सेंटर्स (GN-FICs) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस नेटवर्क का उद्देश्य क्षेत्र-विशिष्ट प्रौद्योगिकी, उत्पाद नवाचार और बड़े स्तर पर अपनाए जा सकने वाले समाधान उपलब्ध कराना है। उनका कार्य संरक्षण कृषि, सटीक पोषक तत्व प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों और मृदा स्वास्थ्य लौटाने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देने तथा सरकारों, निजी क्षेत्र और किसानों के बीच साझेदारी मजबूत करने के लिए भी कई पहल का नेतृत्व किया है।

सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CSIR-NIIST) के निदेशक डॉ. आनंदरामकृष्णन चिन्नास्वामी को खाद्य प्रसंस्करण, संरक्षण और मूल्य संवर्धन प्रौद्योगिकी में उनके अग्रणी कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। उनका शोध खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने, कटाई-पश्चात नुकसान कम करने तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुधारने पर केंद्रित रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और पूरी मूल्य श्रृंखला में खाद्य अपव्यय कम करने में मदद मिली है।

भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डॉ. राजीव वर्ष्णेय, जो ऑस्ट्रेलिया के मर्डोक विश्वविद्यालय में कृषि एवं खाद्य सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय चेयर हैं, फसल जीनोमिक्स और आणविक प्रजनन (Molecular Breeding) में अपने क्रांतिकारी कार्यों के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। उनके शोध ने विशेष रूप से दलहनी और अनाज फसलों में जलवायु अनुकूल तथा अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास की प्रक्रिया को तेज किया है, जिससे एशिया और अफ्रीका के लाखों किसानों को लाभ मिला है।

वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन ने कहा कि इस वर्ष का TAP समूह विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को प्रदर्शित करता है। इनमें फसल एवं पशुधन अनुसंधान, पोषण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मीथेन उत्सर्जन में कमी, कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग तथा उभरती खाद्य प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन की अध्यक्ष मशाल हुसैन ने कहा, “वर्ष 2026 का TAP समूह उन इनोवेटर्स को सम्मानित करता है जो विज्ञान आधारित व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से विभिन्न मौजूदा और उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, ताकि एक अधिक लचीला, टिकाऊ और खाद्य सुरक्षित विश्व बनाया जा सके, जिसके हम सभी हकदार हैं।”