विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है और आने वाले महीनों में यह दुनिया के मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप विश्व के विभिन्न हिस्सों में लू, सूखा, बाढ़ और अन्य चरम मौसम घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।
मंगलवार को जारी WMO की नवीनतम अल नीनो/ला नीना अपडेट के अनुसार, जून-अगस्त 2026 की अवधि में अल नीनो के विकसित होने की संभावना 80% है। इसके कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभावना 90% या उससे अधिक आंकी गई है। अधिकांश जलवायु मॉडल संकेत देते हैं कि यह घटना मध्यम से लेकर अधिक तीव्रता तक पहुंच सकती है।
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने कहा कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म समुद्री सतह अल नीनो बनने को बढ़ावा दे रहा है। अप्रैल के अंत से मई के मध्य तक के अवलोकनों में समुद्र का सतही तापमान अल नीनो की सीमा के करीब पहुंचता दिखाई दिया। वहीं, कई क्षेत्रों में समुद्र की सतह के नीचे का तापमान सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक पाया गया, जो आगे की गर्मी को बनाए रखने में सक्षम है।
WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि दुनिया को संभावित रूप से मजबूत अल नीनो घटना के लिए तैयार रहना चाहिए, जो सूखे की स्थिति को और गंभीर बना सकती है, भारी वर्षा की घटनाओं को बढ़ा सकती है और भूमि तथा महासागरों दोनों में हीटवेव के जोखिम को बढ़ा सकती है। साउलो ने कहा कि 2023-24 का अल नीनो रिकॉर्ड पर दर्ज पांच सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक था और उसने 2024 में रिकॉर्ड वैश्विक तापमान में योगदान दिया था।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति को एक गंभीर जलवायु चेतावनी बताया और कहा कि अल नीनो पहले से गर्म होती दुनिया पर और अधिक दबाव डालेगा। वीडियो संदेश में गुटेरेस ने कहा, “विज्ञान स्पष्ट है। 90% निश्चितता के साथ अल नीनो आने वाले महीनों में हमारे दरवाजे पर दस्तक देने वाला है।” उन्होंने सरकारों से जलवायु पर कार्रवाई तेज करने, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव को गति देने का आह्वान किया।
अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) प्रणाली का एक चरण है, जो पृथ्वी की सबसे प्रभावशाली प्राकृतिक जलवायु प्रणालियों में से एक माना जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाती है। यह घटना आमतौर पर हर दो से सात वर्ष में विकसित होती है, नौ से बारह महीने तक बनी रहती है और प्रायः नवंबर से फरवरी के बीच अपनी चरम तीव्रता पर पहुंचती है।
हालांकि वैज्ञानिकों को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि जलवायु परिवर्तन अल नीनो की आवृत्ति या तीव्रता को बढ़ाता है, लेकिन WMO का कहना है कि गर्म होता महासागर और वातावरण इसके प्रभावों को और अधिक गंभीर बना सकते हैं। अतिरिक्त ऊष्मा और नमी चरम मौसम घटनाओं को बढ़ाती हैं।
डब्लूएमओ के अनुसार जून-अगस्त अवधि में दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। इससे हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है, कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की स्थिति तेजी से विकसित हो सकती है और जलवायु संबंधी जोखिम और जटिल हो सकते हैं।
दक्षिण एशिया में औसत से कम मानसूनी वर्षा होने की संभावना है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। अफ्रीका के ग्रेटर हॉर्न क्षेत्र में भी जून से सितंबर के महत्वपूर्ण वर्षा मौसम के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका है। मध्य अमेरिका में भी अधिक गर्म और शुष्क परिस्थितियां रहने का अनुमान है। इसके विपरीत, अल नीनो आमतौर पर दक्षिणी दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, मध्य एशिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में अधिक वर्षा लाता है।