वैश्विक डेयरी कारोबार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दूध पाउडर जैसे पारंपरिक उत्पादों के मुकाबले चीज वैश्विक व्यापार की वृद्धि का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। यूरोपीय संघ अभी भी सबसे बड़ा डेयरी निर्यातक है, लेकिन वैश्विक व्यापार में उसकी हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है। वहीं, अमेरिका, अर्जेंटीना और उरुग्वे अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
चीन अब भी दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी आयातक है, लेकिन उसकी खरीद में गिरावट के कारण निर्यातकों की उम्मीदें अब पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ब्राजील जैसे बाजारों पर टिकी हैं।
रैबोबैंक की रिसर्च इकाई रैबोरिसर्च की ‘वर्ल्ड डेयरी मैप 2026: चीज लीड्स ग्रोथ एज सप्लाई पावर शिफ्ट्स’ रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक डेयरी व्यापार दीर्घकाल में करीब 2 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच वैश्विक डेयरी व्यापार 11 प्रतिशत बढ़कर 91.1 अरब किलोग्राम से 101.2 अरब किलोग्राम लिक्विड मिल्क इक्विवेलेंट (एलएमई) तक पहुंच गया।
न्यूजीलैंड दुनिया का सबसे बड़ा एकल देश डेयरी निर्यातक बना हुआ है और वैश्विक डेयरी व्यापार में उसकी हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत है। वहीं, अमेरिका की हिस्सेदारी 2017 के 11.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 13.5 प्रतिशत हो गई।
रैबोरिसर्च का मानना है कि अमेरिका में दूध उत्पादन बढ़ने के साथ चीज और व्हे प्रसंस्करण क्षमता में बड़े निवेश हुए हैं। इससे आने वाले वर्षों में वैश्विक चीज और व्हे बाजार में अमेरिकी हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
उत्पादों की मांग में बदलाव
डेयरी उत्पादों में पनीर सबसे मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है, जबकि मिल्क पाउडर में वृद्धि की रफ्तार अपेक्षाकृत कमजोर है। अमेरिका से निर्यात में तेज बढ़ोतरी के कारण वर्ष 2025 में मक्खन के वैश्विक व्यापार में जोरदार उछाल आया। वहीं, प्रोटीन आधारित उत्पादों में मजबूत मांग के कारण व्हे का महत्व और मूल्य लगातार बढ़ रहा है।
आगे भी वैश्विक डेयरी व्यापार में स्थिर वृद्धि जारी रहने और इसकी रफ्तार में मामूली तेजी आने की उम्मीद है। भविष्य में आपूर्ति विस्तार का नेतृत्व करने के लिए अमेरिका और अर्जेंटीना सबसे बेहतर स्थिति में हैं, जबकि यूरोप में दूध उत्पादन संबंधी बाधाएं और अधिक बढ़ने की संभावना है।
यह बदलाव भारत जैसे विशाल दूध उत्पादक देश के लिए महत्वपूर्ण है। भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्य रूप से घरेलू खपत पर आधारित है और वैश्विक डेयरी व्यापार में उसकी भूमिका सीमित रही है। लेकिन पनीर, व्हे प्रोटीन, मिल्क प्रोटीन कॉन्संट्रेट और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग भारतीय डेयरी उद्योग के लिए निर्यात और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने का अवसर पैदा कर सकती है।
नए बाजारों की तलाश
चीन दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी आयातक बना हुआ है, लेकिन उसकी खरीद में कमी ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। निर्यातक अब पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
पश्चिम एशिया में सीमित घरेलू डेयरी उत्पादन क्षमता, तेज जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और आय में वृद्धि के कारण आयात पर निर्भरता बनी हुई है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे बाजारों में डेयरी आयात की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान वैश्विक डेयरी आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
भारत की भौगोलिक स्थिति उसे पश्चिम एशिया के बाजारों में अपेक्षाकृत बेहतर लॉजिस्टिक पहुंच प्रदान करती है। यदि भारतीय डेयरी उद्योग अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, प्रतिस्पर्धी लागत, कोल्ड चेन और निर्यात-उन्मुख प्रसंस्करण क्षमता पर ध्यान देता है, तो वह बदलते वैश्विक व्यापार प्रवाह का लाभ उठा सकता है।
दूध उत्पादन वृद्धि पड़ रही धीमी
वैश्विक स्तर पर दूध उत्पादन की वृद्धि भी अब धीमी पड़ रही है। रैबोरिसर्च के एक अन्य हालिया आकलन के अनुसार, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में लगातार चार तिमाहियों तक 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के बाद उत्पादन की रफ्तार कम होने लगी है। 2025 की चौथी तिमाही में वृद्धि 5.2 प्रतिशत तक पहुंची थी, लेकिन 2026 की दूसरी तिमाही में इसके घटकर 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। तीसरी तिमाही में उत्पादन लगभग स्थिर रहने और चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत घटने का अनुमान है।