अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर, जानिए समझौते की खास बातें

अमेरिका और ईरान ने 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते के तहत 60 दिनों की शांति वार्ता शुरू होगी, परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी और आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत का रास्ता खुल सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर, जानिए समझौते की खास बातें

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दोनों देशों ने 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) लागू हो गया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात फ्रांस के वर्साय पैलेस में जी-7 सम्मेलन के बाद आयोजित रात्रिभोज के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के तहत दोनों देशों ने सैन्य टकराव समाप्त करने, होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने, कूटनीतिक संवाद बढ़ाने और व्यापक शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति जताई है। इस अवधि के दौरान स्विट्जरलैंड में उच्चस्तरीय वार्ताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य एक स्थायी और व्यापक शांति समझौते का खाका तैयार करना होगा।

समझौते के अनुसार, अमेरिका और ईरान तत्काल प्रभाव से सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों रोकेंगे। इसमें लेबनान भी शामिल है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।

एमओयू में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल हैं। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। अगले 30 दिनों में इस समुद्री मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल करने की योजना बनाई गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी है। ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेगा। समझौते के तहत उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार और संवर्धन गतिविधियों पर भी चर्चा होगी।

अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम को समर्थन देने का प्रस्ताव रखा गया है। माना जा रहा है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी।

समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। निवेशकों ने ईरानी तेल आपूर्ति में संभावित वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की संभावना को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।

हालांकि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम शांति समझौता नहीं है, बल्कि व्यापक समझौते की दिशा में एक प्रारंभिक कदम है। अगले 60 दिनों की वार्ताओं में प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। दोनों पक्षों के पास अभी भी समझौते से पीछे हटने का विकल्प मौजूद है, इसलिए इसकी सफलता आगामी वार्ताओं की प्रगति पर निर्भर करेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो अमेरिका और ईरान के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता तथा शांति को बढ़ावा मिल सकता है।

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