केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन और खपत को तेजी से बढ़ाना, कचरे से ऊर्जा उत्पादन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और CBG संयंत्रों को व्यावसायिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाना है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा संचालित यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी।
यह योजना CBG क्षेत्र के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों, जैसे सुनिश्चित मांग, कीमतों में अनिश्चितता, अधिक पूंजीगत लागत, फीडस्टॉक जुटाना, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और संस्थागत वित्त तक पहुंच को दूर करने पर केंद्रित है।
CBG की सुनिश्चित खरीद के लिए ब्लेंडिंग अनिवार्य
योजना की प्रमुख विशेषताओं में CBG की सुनिश्चित खरीद व्यवस्था शामिल है। CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) कंपनियों के लिए CBG की निर्धारित मात्रा में ब्लेंडिंग अनिवार्य की जाएगी। यह लक्ष्य 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत रखा गया है। निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियों पर एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) गैस आवंटन में कटौती जैसी नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।
CBG की कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBtu
नई मूल्य निर्धारण व्यवस्था के तहत CBG की प्रशासित कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBtu तय की गई है। इसमें कर और कंप्रेशन शुल्क शामिल नहीं हैं। यह कीमत कम से कम 10 वर्षों के लिए एक निर्धारित सिंक्रोनाइजेशन ऑपरेटर के माध्यम से लागू की जाएगी, जिससे CBG उत्पादकों को लंबे समय तक कीमतों को लेकर निश्चितता मिल सकेगी।
हालांकि, सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि खरीद कीमत में हुई पूरी वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। योजना के तहत सरकार CBG के लिए 10 रुपये प्रति किलोग्राम की सहायता देगी। 95 प्रतिशत मीथेन वाले CBG के लिए यह लगभग 215 रुपये प्रति MMBtu के बराबर होगी।
मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में CBG उत्पादकों को मिलने वाली कीमत CNG के खुदरा बिक्री मूल्य के 85 प्रतिशत से जुड़ी है और वर्तमान आधार पर यह लगभग 1,478 रुपये प्रति MMBtu बैठती है। सरकारी सहायता को घटाने के बाद CBG की प्रभावी लागत लगभग 1,895 रुपये प्रति MMBtu होगी। यानी वास्तविक वृद्धि करीब 28 प्रतिशत होगी, जबकि खरीद कीमत में बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा कि 2,110 रुपये प्रति MMBtu उत्पादकों को दी जाने वाली खरीद कीमत है, न कि CNG या घरेलू PNG उपभोक्ताओं द्वारा सीधे चुकाई जाने वाली कीमत।
इसके अलावा, बायोगैस सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को उसकी खरीद कीमत पर सीधे नहीं बेची जाएगी। इसे अन्य घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर एक साझा गैस पूल में शामिल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे व्यक्तिगत उपभोक्ताओं पर कीमत का प्रभाव नगण्य रहेगा।
पूंजीगत सहायता और पाइपलाइन के लिए 5,133 करोड़ रुपये
योजना में नए CBG संयंत्र स्थापित करने के लिए 7,063 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता का प्रावधान है। ग्रीनफील्ड CBG संयंत्रों को प्रति टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता पर अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक सहायता मिल सकेगी। इसमें मशीनरी के साथ फीडस्टॉक जुटाने तथा जैविक खाद प्रसंस्करण उपकरणों के लिए सहायता शामिल होगी। विशेष श्रेणी वाले क्षेत्रों में स्थित परियोजनाओं को मशीनरी के लिए अतिरिक्त 20 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी।
CBG की निकासी और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 5,133 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। क्लस्टर आधारित ट्रंक पाइपलाइन के लिए पात्र पूंजीगत लागत का 80 प्रतिशत तक और अलग-अलग संयंत्रों को नजदीकी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क से जोड़ने के लिए पूंजीगत खर्च का 50 प्रतिशत तक समर्थन दिया जाएगा।
MSME को क्रेडिट गारंटी, अनुसंधान पर जोर
MSME क्षेत्र की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 625 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत पात्र परियोजनाओं में डिफॉल्ट राशि के 85 प्रतिशत तक की गारंटी दी जा सकेगी। सामान्य MSME परियोजनाओं के लिए इसकी सीमा 20 करोड़ रुपये और महिला-नेतृत्व वाली MSME परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ रुपये होगी।
इसके अलावा, 500 करोड़ रुपये के CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड के जरिए घरेलू उपकरण निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, उत्पादकता बढ़ाने, फीडस्टॉक मैपिंग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
जैविक खाद और सर्कुलर इकोनॉमी पर भी जोर
योजना के तहत CBG संयंत्रों से निकलने वाले सह-उत्पादों के लिए भी बाजार विकसित करने पर जोर दिया गया है। उर्वरक विभाग फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद (FOM), तरल FOM और फॉस्फेट बहुल ऑर्गेनिक खाद (PROM) की मार्केटिंग के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगा। उर्वरक मार्केटिंग कंपनियों के लिए गोबरधन योजना के तहत उत्पादित FOM की खरीद धीरे-धीरे बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। जैविक खाद की बिक्री से जुड़ी नियामकीय छूट भी 2035-36 तक जारी रहेगी।
नई योजना के साथ कई मौजूदा और समान प्रकृति वाली योजनाओं को तर्कसंगत बनाया जाएगा या नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इनमें SATAT पहल, वेस्ट-टू-एनर्जी कार्यक्रम की कुछ सहायता योजनाएं, बायोमास एग्रीगेशन और पाइपलाइन संबंधी योजनाएं शामिल हैं।
सरकार को उम्मीद है कि गोबरधन योजना से CBG के लिए दीर्घकालिक मांग सुनिश्चित होगी, संयंत्रों की आर्थिक व्यवहार्यता सुधरेगी, कचरे से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और देश में एक मजबूत घरेलू CBG पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा। साथ ही, व्यापक गैस पूल और सरकारी सहायता के कारण CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा अतिरिक्त बोझ की संभावना नहीं है।