भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर AIKS ने पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग की, केंद्र ने बातचीत में देरी की खबरों को बताया गलत

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध बढ़ने लगा है। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग करते हुए समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। वहीं, पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ वार्ता में देरी की खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए संतुलित समझौते के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विवाद तेज हो गया है। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रस्तावित व्यापार समझौते को तत्काल रोकने की मांग की है। वहीं केंद्र सरकार ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि भारत अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में देरी कर रहा है।

AIKS ने एक कड़े बयान में आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर किसानों, संसद और राज्य सरकारों से बिना कोई परामर्श किए बातचीत की जा रही है, जबकि संविधान के अनुसार कृषि राज्य का विषय है। किसान संगठन ने सरकार पर किसानों के हितों और देश की संप्रभुता से समझौता करने का आरोप लगाया तथा किसानों से 22 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की।

AIKS का दावा है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन, कपास और डेयरी उत्पादों जैसे भारी सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों के शुल्क-मुक्त आयात का रास्ता खुल सकता है। संगठन का कहना है कि इससे घरेलू कृषि बाजार पर दबाव बढ़ेगा और छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। AIKS ने यह भी मांग की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते तथा अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का पूरा मसौदा अंतिम निर्णय से पहले संसद, राज्य सरकारों और किसानों के प्रतिनिधियों के सामने सार्वजनिक किया जाए।

किसान संगठन ने अपनी चिंताओं को कपास और सोयाबीन की हालिया कीमतों से भी जोड़ा। उसका आरोप है कि बढ़ते आयात के कारण वर्ष 2025-26 में कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चले गए, जबकि सोयाबीन किसानों को भी बाजार भाव MSP से काफी कम मिलने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा। AIKS का कहना है कि यदि प्रस्तावित समझौते के तहत और अधिक शुल्क रियायतें दी गईं तो मौजूदा सीजन में किसानों की मूल्य संबंधी समस्याएं और गहरा सकती हैं।

इस बीच, अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में भारत द्वारा देरी किए जाने की मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन दावों को "पूरी तरह गलत, निराधार और भ्रामक" बताया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में गोयल ने कहा कि जून में नई दिल्ली यात्रा के दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के साथ उनकी अच्छी बैठकें हुई थीं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक ऐसे "संतुलित और व्यावसायिक रूप से सार्थक" समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों, किसानों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को ठोस लाभ मिले।

गोयल ने कहा, हमारी टीमें इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं, और दोहराया कि व्यापार वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि भारत अमेरिकी दबाव के बावजूद जल्दबाजी में अंतरिम समझौता करने के पक्ष में नहीं है और बेहतर शर्तों पर बातचीत करना चाहता है।

हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं में तेजी आई है। दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने से पहले एक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, किसान संगठनों ने लगातार आशंका जताई है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच मिलने से भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते में भारत के कृषि क्षेत्र के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।