बीमा कंपनियों को फसल बीमा से हर साल हो रही 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमाई
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि 2019 के बाद से बीमा कंपनियों के पास जमा प्रीमियम और दावा भुगतान का अंतर हर वर्ष 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। यही नहीं, किसानों का प्रीमियम लगातार बढ़ रहा है, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों का अंशदान घट रहा है।
- साल-दर-साल किसानों के प्रीमियम में वृद्धि लेकिन राज्यों और केंद्र सरकार के प्रीमियम में कमी
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान हैं दिनेश वाघ। दो साल पहले, 2024 में उन्होंने अपने खेत में अरहर लगाया था। लेकिन गर्मी अधिक होने के कारण पूरी फसल नष्ट हो गई। उन्होंने फसल बीमा करवा रखा था, सो नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी के पास आवेदन किया। सर्वे वगैरह के बाद बीमा कंपनी ने उन्हें सिर्फ 6,670 रुपये का भुगतान किया। अगर फसल नष्ट न होती तो उसे बेचकर 70 से 80 हजार रुपये मिलते।
दिनेश केले की भी खेती करते हैं। इस साल भी पांच एकड़ में केले लगाए थे। लेकिन मई-जून में आंधी-बारिश के कारण करीब ढाई एकड़ में केले के पेड़ गिर गए। दो महीने बाद केले तैयार होते तो उन्हें बेचकर 12-15 लाख रुपये मिल जाते। बीमा दावे के पुराने अनुभव को देखते हुए उन्होंने इस बार केले की फसल का बीमा नहीं कराया था। लेकिन उनके आस-पास के जिन किसानों ने बीमा कराया है, उनके अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि क्लेम भुगतान के लिए बीमा कंपनियों का ‘ट्रिगर’ होता है। जैसे, गर्मी में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने या ठंड में तापमान 7 डिग्री से कम होने पर यदि फसल को नुकसान हुआ, तभी क्लेम मिलेगा। लेकिन सोलापुर में 45 डिग्री से अधिक या 7 डिग्री से कम तापमान शायद ही कभी जाता हो।
एक अन्य किसान दत्तात्रेय मुळे पाटील ने एक और बात बताई। उन्होंने कहा कि आंधी-तूफान की स्थिति में बीमा कंपनियां हवा की गति को भी देखती हैं। इसके आंकड़े वे मौसम विभाग से लेती हैं। भले ही किसान की फसल नष्ट हो गई हो, अगर मौसम विभाग ने बताया कि हवा की गति बीमा कंपनी के ‘ट्रिगर’ से कम है तो किसान के दावे का भुगतान नहीं मिलेगा।
एक तरफ फसल बीमा को लेकर किसानों की ये शिकायतें हैं तो दूसरी तरफ एक और आंकड़ा देखिए। बीमा कंपनियों को मिलने वाले कुल प्रीमियम और उनकी तरफ से दिए गए क्लेम का अंतर (2018 से 2025 तक) देखें तो 2019 के बाद हर साल उन्हें 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 8 वर्षों में किसानों, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने कुल मिलाकर 2,17,260 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया जबकि बीमा कंपनियों ने 1,42,562 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान किया। इस तरह इन 8 वर्षों में बीमा कंपनियों को 74,697 करोड़ रुपये की बचत हुई है। हालांकि इसे बीमा कंपनियों का मुनाफा नहीं कह सकते, क्योंकि उनके ऑपरेशनल तथा दूसरे खर्च भी हैं।
कुल प्रीमियम, दावा भुगतान और बीमा कंपनियों की कमाई
|
वर्ष |
प्रीमियम |
दावा भुगतान |
प्रीमियम और दावा भुगतान का अंतर |
|
2018 |
24,714.64 |
23,586.39 |
1,128.25 |
|
2019 |
26,397.96 |
25,873.89 |
524.07 |
|
2020 |
29,636.47 |
19,520.67 |
10,115.80 |
|
2021 |
29,915.08 |
19,022.47 |
10,892.61 |
|
2022 |
31,033.63 |
17,501.22 |
13,532.41 |
|
2023 |
29,661.79 |
18,215.48 |
11,446.31 |
|
2024 |
26,771.51 |
12,557.33 |
14,214.18 |
|
2025 |
19,128.98 |
6,284.85 |
12,844.13 |
|
कुल |
2,17,260.06 |
1,42,562.30 |
74,697.76 |
(राशि करोड़ रुपये में 30 जून 2026 तक, स्रोतः pmfby.gov.in)
खरीफः दो साल से घट रहा सरकार का प्रीमियम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खरीफ 2024 से खरीफ 2025 के दौरान राज्यों की संख्या 22 से बढ़कर 24 हो गई, लेकिन पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY) और आरडब्लूबीसीआईएस (RWBCIS) के तहत आवेदन करने वाले किसानों की कुल संख्या 9.62 करोड़ से घटकर 8.47 करोड़ रह गई।
खरीफ 2024 से खरीफ 2025 के दौरान संख्या घटने के बावजूद किसानों ने 48 प्रतिशत ज्यादा, 2227.49 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया। लेकिन इस दौरान राज्य सरकारों की तरफ से दिए जाने वाले प्रीमियम में 44 प्रतिशत और केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाने वाले प्रीमियम में 33 प्रतिशत की कमी आई।
खरीफ फसलों का प्रीमियम
|
वर्ष |
किसान |
राज्य |
केंद्र |
कुल प्रीमियम |
दावा भुगतान |
|
2023 |
1,803.18 |
10,524.82 |
8,081.74 |
20,409.74 |
13,030.44 |
|
2024 |
1,506.23 |
9,876.71 |
7,520.70 |
18,903.64 |
8,592.18 |
|
2025 |
2,227.49 |
5,557.12 |
5,049.17 |
12,833.78 |
5,951.32 |
(राशि करोड़ रुपये में, स्रोतः pmfby.gov.in)
खरीफ फसलों के लिए किसानों की तरफ से दी जाने वाली प्रीमियम राशि 2023 के बाद दो वर्षों में लगातार बढ़ी है, जबकि इन दोनों वर्षों में राज्यों और केंद्र सरकार की तरफ से दी जाने वाली प्रीमियम राशि घटी है। किसानों ने खरीफ 2023 में 1,803 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया जो 2025 में बढ़कर 2,227 करोड़ रुपये हो गया। राज्यों का प्रीमियम 2023 में 10,525 करोड़ रुपये था जो 2025 में घटकर 5,557 करोड़ रुपये रह गया। केंद्र का प्रीमियम भी इस दौरान 8,082 करोड़ की तुलना में 5,049 करोड़ रुपये रह गया।
रबीः 2021 से घट रहा सरकार का प्रीमियम
रबी 2024 से 2025 के दौरान भी पीएम फसल बीमा योजना और आरडब्लूबीसीआईएस में आवेदन करने वाले किसानों की संख्या 5.29 करोड़ से घटकर 5.16 करोड़ रह गई। संख्या घटने के बावजूद किसानों ने 1.25 प्रतिशत ज्यादा, 1441 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया। लेकिन इस दौरान राज्य सरकारों की तरफ से दिए जाने वाले प्रीमियम में 29 प्रतिशत और केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाने वाले प्रीमियम में 19 प्रतिशत की कमी आई।
रोचक बात यह है कि रबी फसलों के लिए किसानों की तरफ से दी जाने वाली प्रीमियम राशि 2021 के बाद लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्यों और केंद्र की तरफ से दी जाने वाली राशि लगातार घट रही है। रबी 2021 के लिए किसानों ने 1,389 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया था, जो हर साल बढ़ता हुआ 2025 में 1,441 करोड़ रुपये हो गया। लेकिन राज्यों की प्रीमियम राशि 5,408 करोड़ से घटकर 2,399 करोड़ और केंद्र की प्रीमियम राशि 4,316 करोड़ से घटकर 2,454 करोड़ रुपये रह गई।
रबी फसलों का प्रीमियम
|
वर्ष |
किसान |
राज्य |
केंद्र |
कुल प्रीमियम |
दावा भुगतान |
|
2021 |
1,389.49 |
5,408.35 |
4,316.84 |
11,114.68 |
5,415.38 |
|
2022 |
1,409.73 |
5,395.11 |
4,205.22 |
11,010.06 |
6,445.31 |
|
2023 |
1,418.90 |
4,219.64 |
3,613.51 |
9,252.05 |
5,185.04 |
|
2024 |
1,423.20 |
3,411.35 |
3,033.32 |
7,867.87 |
3,965.15 |
|
2025 |
1,441.08 |
2,399.56 |
2,454.56 |
6,295.20 |
333.53 |
(राशि करोड़ रुपये में, स्रोतः pmfby.gov.in)
फसल बीमा 1985 में शुरू, मौजूदा योजना 2016 से लागू
कृषि में प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि मंत्रालय ने वर्ष 1985 में फसल बीमा योजना शुरू की थी। राज्य सरकारों, किसान समुदाय और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए। मौजूदा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) फरवरी 2016 में शुरू की गई थी। विभिन्न अध्ययनों को ध्यान में रखते हुए योजना के ऑपरेशनल गाइडलाइंस में संशोधन किए गए जो खरीफ 2023 सीजन से प्रभावी हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य ओलावृष्टि, सूखा, बाढ़, चक्रवात, भारी एवं असमय बारिश, रोग एवं कीटों के प्रकोप जैसी आपदाओं से प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। हालांकि फरवरी 2016 में योजना शुरू होने के बाद सभी राज्यों ने इसे लागू नहीं किया, तो कुछ राज्य इसमें शामिल होने के बाद निकल गए। वर्ष 2025 में खरीफ के दौरान 24 राज्यों ने और रबी के दौरान 21 राज्यों ने इसे लागू किया था। वर्ष 2024 में खरीफ के दौरान इस योजना को लागू करने वाले राज्यों की संख्या 22 और रबी में 21 थी।
पीएम फसल बीमा योजना के साथ पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) भी शुरू की गई थी। यह किसानों को अत्यधिक वर्षा, सूखा, उच्च तापमान या अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए है। इस योजना के तहत मुख्य रूप से बागवानी फसलों के लिए है। इसके अंतर्गत नुकसान का आकलन करने के लिए मौसम संबंधी आंकड़ों को फसल नुकसान का प्रॉक्सी माना जाता है और पूर्व निर्धारित मौसम मानकों के आधार पर दावे का भुगतान करने का प्रावधान है।
फसलों के लिए प्रीमियम की दरें
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के लिए अधिकतम प्रीमियम दर खरीफ की खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए 2 प्रतिशत है। रबी की खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए यह 1.5 प्रतिशत है। कॉमर्शियल एवं बागवानी फसलों के लिए प्रीमियम दर 5 प्रतिशत है। शेष प्रीमियम का भुगतान राज्य एवं केंद्र सरकारें करती हैं।
पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए सरकारी प्रीमियम में केंद्र और राज्यों का अनुपात 90:10 है, अन्य राज्यों के लिए यह 50:50 है। यह योजना राज्यों और किसानों, दोनों के लिए स्वैच्छिक है। यह एक मांग आधारित योजना है, इसलिए सभी किसान राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित फसलों और क्षेत्रों का बीमा करा सकते हैं।
कृषि मंत्रालय की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) का कार्यान्वयन 20 अधिकृत साधारण बीमा कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र की पांच बीमा कंपनियां शामिल हैं।

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