ऐसे समय जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार में व्यवधान और बढ़ती महंगाई के कारण धीमी पड़ रही है, भारत एक अपेक्षाकृत मजबूत प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर लगभग 6.5% रहने का अनुमान है। यह इसके जनवरी के हनुमान से 0.1 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण तेल कीमतों और व्यापार प्रवाह पर असर पड़ने से वैश्विक आर्थिक गति कमजोर पड़ रही है।
हाल के महीनों में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य खराब हुआ है और IMF ने बढ़ती अनिश्चितताओं के चलते वृद्धि अनुमान घटाए हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है, तेल कीमतों को बढ़ाया है और दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ाया है, जिससे 2026 में वैश्विक वृद्धि लगभग 3.1% तक सीमित रहने का अनुमान है। ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर अधिक पड़ने की आशंका है, क्योंकि उनके आयात बिल और वित्तीय अस्थिरता बढ़ सकती है।
इस चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत की विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। IMF द्वारा FY27 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान में हल्का संशोधन इस बात का संकेत है कि भारत की घरेलू मांग, व्यापक आर्थिक स्थिरता और नीतिगत ढांचा मजबूत है। अनुमान है कि FY28 में भी भारत इसी तरह की विकास गति बनाए रखेगा, जिससे वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
हालांकि, इस सकारात्मक परिदृश्य के सामने जोखिम भी मौजूद हैं। S&P ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, जो तनावपूर्ण स्थिति में 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, तो भारत की वृद्धि दर में 80 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है। ऊंची ऊर्जा लागत का असर घरेलू खपत, कॉरपोरेट मुनाफे और बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक झटकों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
इन जोखिमों के बावजूद, भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत मानी जा रही है, जो इन बाहरी झटकों को झेलने में सहायक हो सकती है। मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, अच्छी पूंजी वाले बैंक और स्थिर बाहरी स्थिति को ऐसे प्रमुख कारकों के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत को अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कुल मिलाकर, वैश्विक आर्थिक स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है और इसका भविष्य काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। IMF ने विभिन्न संभावित परिदृश्यों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है या और बढ़ता है, तो इससे वैश्विक वृद्धि और अधिक प्रभावित हो सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।