शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कॉकरोच जनता पार्टी बाकी दो मांगों पर अड़ी

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। पेपर लीक के खिलाफ करीब 10 दिन चले छात्र आंदोलन के बाद उन्होंने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग यही थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। पेपर लीक के खिलाफ करीब 10 दिन चले छात्र आंदोलन के बाद उन्होंने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग यही थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, “कहा जाता था इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” सोनम वांगचुक ने सीजेपी और Gen Z को बधाई देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है।

कांग्रेस पार्टी ने एक्स पर लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की जीत है, भारत के GEN Z की जीत है। ये जीत उन करोड़ों युवाओं की है, जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवाज बुलंद की।”  

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा है, “पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है। जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।”

हालांकि प्रधान के इस्तीफे के बाद भी सीजेपी ने धरना-प्रदर्शन जारी रखने के संकेत दिए हैं। अभिजीत दीपके ने कहा है कि हमारी दो मांगें और हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। दूसरा, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। इसके अलावा, 20 तारीख की कार्रवाई करने वाले पुलिस गुंडों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

इस बीच पेपर लीक रोकने के लिए नया विधेयक सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम (The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act) 2024 में पेपर लीक से जुड़े अपराधों के लिए जेल की सजा को बढ़ाकर 10 साल तक करने और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

संसद सदस्यों को इस विधेयक की प्रति वितरित की गई है। इसके मुताबिक परीक्षाओं में पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की जेल की सजा तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।