पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यातकों के लिए सरकार ने लांच की 497 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ योजना

केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए ‘RELIEF’ योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत ECGC के माध्यम से 497 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। यह योजना पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक्स बाधाओं, बढ़ते मालभाड़े और बीमा लागत से प्रभावित निर्यातकों को राहत देगी।

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात और खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स पर उसके प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्यातकों की मदद के लिए एक विशेष ‘रिलीफ’ (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना शुरू की है। यह समयबद्ध और लक्षित योजना एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) के तहत लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री मार्ग में बाधाओं के कारण बढ़े मालभाड़े, महंगे बीमा प्रीमियम और युद्ध से जुड़े जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत देना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, हाल के घटनाक्रम, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाजों के मार्ग बदलने, लंबी दूरी तय करने, ट्रांसशिपमेंट हब पर भीड़ और आपातकालीन सरचार्ज जैसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। इससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी है और निर्यात गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा हुई है।

ECGC होगी नोडल एजेंसी

इस योजना के तहत ईसीजीसी को नोडल और कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है। यह एजेंसी दावों की जांच, भुगतान, वितरण और निगरानी का जिम्मा संभालेगी। निर्यात ऋण जोखिम कवर देने में ईसीजीसी के अनुभव से समय पर और विश्वसनीय सहायता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

RELIEF योजना के तीन प्रमुख घटक

रिलीफ योजना में तीन प्रमुख घटक शामिल हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, इजराइल, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे देशों के लिए भेजे जाने वाले निर्यात पर लागू होंगे।

पहला, जिन निर्यातकों ने पहले से ECGC बीमा लिया हुआ है, उन्हें 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच भेजे गए माल पर अतिरिक्त 100% जोखिम कवर मिलेगा, जिससे उन्हें बिना अतिरिक्त खर्च के सुरक्षा मिलेगी।

दूसरा, 16 मार्च से 15 जून 2026 तक प्रस्तावित निर्यात के लिए सरकार के समर्थन से 95% तक अतिरिक्त जोखिम कवर दिया जाएगा, जिससे अनिश्चितता के बीच निर्यात जारी रखने में मदद मिलेगी।

तीसरा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निर्यातकों के लिए, जिन्होंने बीमा नहीं लिया था, लेकिन बढ़े हुए फ्रेट और बीमा लागत का सामना कर रहे हैं, उनके लिए 50% तक आंशिक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यह सहायता अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति निर्यातक तक सीमित होगी और निर्धारित शर्तों के तहत दी जाएगी।

497 करोड़ रुपये का प्रावधान

इस योजना के लिए कुल 497 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। ईसीजीसी एक डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए दावों और फंड उपयोग की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन संचालन समिति समय-समय पर योजना की समीक्षा करेगी और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव कर सकती है।

सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से लॉजिस्टिक्स बाधाओं के तात्कालिक प्रभाव को कम करना, निर्यातकों का विश्वास बनाए रखना, ऑर्डर रद्द होने से रोकना और निर्यात आधारित क्षेत्रों में रोजगार की रक्षा करना है।

अंतर-मंत्रालयी समूह की निगरानी

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए 2 मार्च 2026 को सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर एक अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) का गठन किया गया था, जिसने 3 मार्च से दैनिक समीक्षा शुरू की। इस समूह में विभिन्न मंत्रालयों, वित्तीय संस्थानों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और निर्यातक संगठनों को शामिल किया गया है।

समूह की सिफारिशों के आधार पर फंसे हुए माल की आवाजाही में ढील, बंदरगाहों पर बेहतर समन्वय, स्टोरेज शुल्क में छूट, शिपिंग कीमतों में पारदर्शिता और बीमा जोखिम की निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए। इन प्रयासों ने जमीनी चुनौतियों का आकलन करने और लक्षित वित्तीय सहायता योजना तैयार करने में मदद की।