India-EU FTA: जानिए प्रमुख कृषि उत्पादों के आयात पर कितना कोटा और टैरिफ लागू होगा

भारत-ईयू एफटीए के तहत चुनिंदा कृषि उत्पादों पर टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) और कीमत आधारित शर्तों के जरिए शुल्क में रियायत दी गई है। वाइन, सेब, कीवी, नाशपाती, आड़ू और पोर्क को निर्धारित सीमा के भीतर कम शुल्क का लाभ मिलेगा। कोटा से अधिक या तय कीमत सीमा से नीचे के आयात पर मौजूदा शुल्क लागू रहेगा।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से यूरोप के कई कृषि उत्पादों के लिए भारत के बाजार में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण पहुंच खुल जाएगी। इसके तहत संवेदनशील कृषि उत्पादों पर बिना शर्त शुल्क कटौती के बजाय टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) और कीमत आधारित रियायतों का प्रावधान किया गया है। यानी निर्धारित मात्रा या कीमत की शर्त पूरी करने वाले आयात पर कम शुल्क लगेगा, जबकि इन सीमाओं से बाहर के आयात पर सामान्य शुल्क जारी रहेगा। समझौते में ईयू से आने वाली वाइन, अन्य अल्कोहलिक उत्पादों, सेब, कीवी, नाशपाती, आड़ू और पोर्क को शामिल किया गया है। अलग-अलग उत्पादों के लिए शुल्क में रियायत की दर, कोटा, आयात मूल्य और समझौते के लागू होने के वर्ष के अनुसार अलग-अलग होगी। थिंकटैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) का विश्लेषण…

प्रीमियम वाइन पर शुल्क 150% से घटकर 20%

भारत ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाली वाइन पर शुल्क रियायतें दी हैं। शुल्क का निर्धारण प्रति 750 मिलीलीटर वाइन के CIF मूल्य और इस आधार पर होगा कि वाइन बोतल में या थोक में आयात की जा रही है। 2.50 यूरो से कम मूल्य वाली वाइन पर कोई रियायत नहीं मिलेगी और उस पर 150% का मूल सीमा शुल्क जारी रहेगा। 2.50 यूरो से 10 यूरो के बीच मूल्य वाली वाइन पर शुल्क पहले वर्ष में 75% होगा और इसके बाद हर वर्ष घटते हुए आठवें वर्ष से 30% हो जाएगा। प्रति 750 मिलीलीटर 10 यूरो या उससे अधिक मूल्य वाली ईयू वाइन पर अधिक रियायत मिलेगी। इसका शुल्क मौजूदा 150% से घटकर पहले वर्ष में 75%, दूसरे वर्ष में 67% और धीरे-धीरे आठवें वर्ष से 20% हो जाएगा। 

वाइन के अलावा अन्य अल्कोहलिक उत्पाद

भारत ने वाइन के अलावा कुछ फर्मेंटेड पेय और उच्च अल्कोहल वाले उत्पादों पर भी शुल्क रियायत दी है। प्रति 750 मिलीलीटर 5 यूरो से कम मूल्य वाले उत्पादों पर कोई रियायत नहीं मिलेगी और 150% का मूल शुल्क जारी रहेगा। 5 यूरो या उससे अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर शुल्क पहले वर्ष में 100% होगा और इसके बाद हर वर्ष पांच प्रतिशत अंक घटकर 11वें वर्ष से 50% हो जाएगा। इन TRQ प्रावधानों में तैयार व्हिस्की सीधे तौर पर शामिल नहीं है।

अधिकतम एक लाख टन सेब का आयात 
भारत कम से कम 80 रुपये प्रति किलोग्राम CIF मूल्य वाले ईयू सेब के लिए बढ़ता हुआ कोटा सुविधा देगा। पहले वर्ष में यह कोटा 50,000 मीट्रिक टन होगा और हर वर्ष 5,000 टन बढ़ते हुए 11वें वर्ष से 1 लाख टन हो जाएगा। कोटे के भीतर आयात पर 20% शुल्क लगेगा। 80 रुपये प्रति किलोग्राम से कम कीमत वाले सेब पर 50% शुल्क जारी रहेगा। कोटे से अधिक आयात पर कोई टैरिफ रियायत नहीं मिलेगी।

कीवी आयात कोटा हर वर्ष 300 टन बढ़ेगा
भारत पहले वर्ष में ईयू से 12,000 मीट्रिक टन कीवी को रियायती शुल्क पर आयात की अनुमति देगा। यह कोटा हर वर्ष 300 टन बढ़कर 11वें वर्ष से 15,000 टन हो जाएगा। कोटे के भीतर शुल्क पहले वर्ष के 16.5% से घटकर छठे वर्ष में 10% हो जाएगा और इसके बाद इसी स्तर पर रहेगा। कोटे से अधिक आयात पर शुल्क में कोई रियायत नहीं मिलेगी।

हर वर्ष 2250 टन नाशपाती आयात का कोटा
भारत ईयू को नाशपाती के लिए हर वर्ष 2,250 मीट्रिक टन का निश्चित कोटा देगा। कोटे के भीतर शुल्क पहले वर्ष के 29.17% से घटकर दूसरे वर्ष में 25.33%, तीसरे वर्ष में 21.5%, चौथे वर्ष में 17.67% और पांचवें वर्ष में 13.83% हो जाएगा। छठे वर्ष से यह 10% हो जाएगा। कोटे से अधिक आयात पर कोई टैरिफ रियायत नहीं मिलेगी।

आड़ू आयात कोटा सिर्फ 20 टन का
भारत ने ईयू के लिए आड़ू का केवल 20 मीट्रिक टन का वार्षिक कोटा दिया है। कोटे के भीतर आयात पर समझौता लागू होने की तारीख से 26.4% शुल्क लगेगा। कोटे से अधिक आयात पर कोई प्राथमिकता शुल्क नहीं मिलेगा।

सालाना 2000 टन पोर्क आयात की अनुमति
भारत हर वर्ष ईयू से 2,000 मीट्रिक टन पोर्क को रियायती शुल्क पर आयात की अनुमति देगा। कोटे के भीतर शुल्क पहले वर्ष के 31.82% से धीरे-धीरे घटकर 11वें वर्ष से 20% हो जाएगा। कोटे से अधिक आयात पर कोई टैरिफ रियायत नहीं मिलेगी।

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कारों पर शुल्क 110% से घटाकर 10% 
भारत ने 2025 में ईयू से केवल 17,191 कारों का आयात किया था। इसके बावजूद व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय वाहन कंपनियों को पहले वर्ष में 1 लाख पूरी तरह निर्मित (CBU) पेट्रोल-डीजल और नॉन-प्लग-इन हाइब्रिड कारों का टैरिफ-रेट कोटा दिया गया है। यह मौजूदा आयात का करीब छह गुना है। 10वें वर्ष तक यह कोटा बढ़कर 1.60 लाख कारों का हो जाएगा और इसके बाद इसी स्तर पर रहेगा। 

यह रियायत केवल 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर लागू होगी। 15,000 से 35,000 यूरो कीमत वाली कारों पर इन-कोटा शुल्क 110% के MFN शुल्क से घटकर पहले वर्ष में 35% और पांचवें वर्ष में 10% हो जाएगा। 35,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर शुल्क 66% के MFN स्तर से घटकर पहले वर्ष में 30% और पांचवें वर्ष में 10% हो जाएगा। कोटा को तीन मूल्य श्रेणियों में बांटा गया है। पांचवें वर्ष से 50,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों के लिए 43,000 इकाइयां आरक्षित होंगी। 15,000 यूरो से कम कीमत वाली कारों पर कोई रियायत नहीं मिलेगी।

भारत कोटे से बाहर आयात होने वाली ईयू कारों पर भी शुल्क कम करेगा। मौजूदा शुल्क 110% या 66% होने के आधार पर 15,000 से 50,000 यूरो कीमत वाली कारों पर आउट-ऑफ-कोटा शुल्क 10वें वर्ष तक घटकर 35% हो जाएगा। 50,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर यह शुल्क घटकर 30% हो जाएगा।

भारत ने पूरी तरह नॉक्ड-डाउन (CKD) पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों के लिए अलग कोटा भी दिया है। पहले पांच वर्षों में यह कोटा हर वर्ष 75,000 इकाइयों का होगा और 10वें वर्ष से धीरे-धीरे घटकर 50,000 इकाइयों पर आ जाएगा। इन-कोटा शुल्क पहले वर्ष के 13.75% से घटकर तीसरे वर्ष से 8.25% हो जाएगा, जबकि मौजूदा शुल्क 16.5% है।

बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों, प्लग-इन हाइब्रिड और अन्य तकनीक वाली कारों के लिए रियायतें पांचवें वर्ष से शुरू होंगी और केवल 20,000 यूरो या उससे अधिक कीमत वाले वाहनों पर लागू होंगी। इनका CBU कोटा पांचवें वर्ष में 20,000 कारों से शुरू होकर 10वें वर्ष में 50,000 और 14वें वर्ष से 90,000 कारों तक पहुंच जाएगा। इन-कोटा शुल्क पांचवें वर्ष के 30% से घटकर 10वें वर्ष में 10% हो जाएगा और इसके बाद इसी स्तर पर रहेगा। इन वाहनों पर सूचीबद्ध मूल शुल्क 110% है। 20,000 यूरो से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक और अन्य पात्र कारों पर कोई रियायत नहीं मिलेगी।