ईरान युद्ध का असर, भारत का बासमती निर्यात ठप पड़ने की आशंका, मध्यपूर्व की है 70 फीसदी हिस्सेदारी

भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है। इसमें से लगभग 70 प्रतिशत निर्यात मध्य-पूर्व के देशों को होता है। मात्रा के लिहाज से यह 40 से 42 लाख टन बैठता है। इसमें से छह से सात लाख टन बासमती चावल का निर्यात हर साल ईरान को होता रहा है

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण भारत से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बासमती का सबसे अधिक निर्यात मध्य-पूर्व के देशों को ही होता है। इसका असर जल्दी ही भारत में बासमती चावल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है और इसके दाम गिर सकते हैं। निर्यात का रूट बाधित होने के कारण अफ्रीकी देशों को गैर-बासमती चावल का निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका बनने लगी है।

भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है। इसमें से लगभग 70 प्रतिशत निर्यात मध्य-पूर्व के देशों को होता है। मात्रा के लिहाज से यह 40 से 42 लाख टन बैठता है। इसमें से छह से सात लाख टन बासमती चावल का निर्यात हर साल ईरान को होता रहा है। ईरान को बासमती निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन का है। युद्ध के कारण ईरान समेत पूरे मध्य-पूर्व को होने वाला निर्यात लगभग ठप पड़ने की आशंका है।

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वैसे तो लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के साथ भारत का कुल व्यापार अधिक नहीं है। प्रतिबंधों का असर बैंकिंग चैनल, शिपिंग और ऊर्जा व्यापार पर अधिक हुआ है। भारत से ईरान को जो निर्यात होता है, उसमें 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चावल का है। कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत ने ईरान को कुल करीब 124 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। इसमें 74.7 करोड़ डॉलर का चावल निर्यात हुआ। 

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 60.65 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। रुपये में इसकी वैल्यू 50,312 करोड़ रुपये और डॉलर में 5.94 अरब डॉलर थी। भारत में 2024-25 में कुल 15.01 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। बासमती चावल का उत्पादन 70 से 75 लाख टन का था।

निर्यात पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत ने 6.07 प्रतिशत चावल का निर्यात ईरान को किया। भारत के 12.47 अरब डॉलर के कुल चावल निर्यात में सऊदी अरब का हिस्सा सबसे अधिक 10.61 प्रतिशत का था। उसके बाद 8.26 प्रतिशत निर्यात बेनिन को और 6.94  प्रतिशत निर्यात इराक को किया गया। प्रमुख खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात को 4.06 प्रतिशत चावल का निर्यात हुआ। 

जहां तक ईरान से आयात का सवाल है, तो भारत ने 40.86 करोड़ डॉलर की वस्तुओं की खरीद की। इसमें 13.57 करोड़ डॉलर का पेट्रोलियम कोक, 7.15 करोड़ डॉलर के सेब और 3.33 करोड़ डॉलर के खजूर का आयात हुआ।

अचानक निर्यात रुकने से भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर 1.5 से दो लाख टन बासमती चावल अटक गया है। लगभग इतनी ही मात्रा ट्रांजिट में है। निर्यात के लिहाज से यह समय भी महत्वपूर्ण है। रमजान के कारण खाड़ी क्षेत्र में इन दिनों सबसे अधिक निर्यात होता है। 

इस युद्ध का भारत पर तात्कालिक असर यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन बाधित होने से उस रास्ते जहाजों की आवाजाही रुक गई है। कच्चे तेल और एलएनजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इसके बाधित होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी और जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ेगा। कच्चा तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने की भी आशंका है।