खरीफ बुवाई 18 लाख हेक्टेयर पीछे, बारिश 11% कम, जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी

7 अगस्त तक भारत में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 17.96 लाख हेक्टेयर पीछे रही, जिसमें धान का सबसे बड़ा योगदान है, हालांकि तिलहन का रकबा बढ़ा है। मानसून की बारिश अभी तक सामान्य से 11% कम है जबकि जलाशयों में भंडार सामान्य से 2.87% नीचे है।

भारत में असमान मानसूनी प्रदर्शन और जलाशयों में कम जल भंडारण के बीच खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष से पीछे चल रही है। कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी 7 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, किसानों ने प्रमुख खरीफ फसलों की 967.92 लाख हेक्टेयर में बुवाई की, जो एक साल पहले के 985.89 लाख हेक्टेयर की तुलना में 17.96 लाख हेक्टेयर या 1.82% कम है। 1 जून से 5 अगस्त के दौरान कुल बारिश सामान्य से 11% कम रही। वहीं, 6 अगस्त तक 166 जलाशयों में जल भंडारण सामान्य से 2.87% कम और पिछले वर्ष के स्तर का केवल 73.25% रहा।

खरीफ बुवाई: धान का रकबा 4.4 प्रतिशत नीचे

कृषि सांख्यिकी विभाग के अनुसार, 7 अगस्त 2026 तक प्रमुख खरीफ फसलों का कुल रकबा 967.92 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 985.89 लाख हेक्टेयर था। यह आंकड़ा संबंधित अवधि के 1,104.46 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्रफल से भी कम है।

धान की बुवाई 344.78 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष के 360.67 लाख हेक्टेयर से 15.90 लाख हेक्टेयर या 4.41% कम है। मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में धान के रकबे में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। वहीं असम, तेलंगाना, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पंजाब में बुवाई का क्षेत्र बढ़ा।

दलहन की बुवाई भी पिछले वर्ष से कम रही। दलहन का रकबा 103.78 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 105.73 लाख हेक्टेयर था। यानी इसमें 1.95 लाख हेक्टेयर या 1.84% की कमी आई। कर्नाटक, महाराष्ट्र और ओडिशा में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में 4.41 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मोटे अनाज और श्रीअन्न का रकबा 4.71 लाख हेक्टेयर घटकर 168.50 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 173.21 लाख हेक्टेयर था। इसमें 2.72% की गिरावट दर्ज की गई। कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु प्रमुख गिरावट वाले राज्यों में रहे, जबकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में रकबा बढ़ा।

सबसे सकारात्मक रुझान तिलहन के क्षेत्र में रहा। तिलहन का रकबा 5.19 लाख हेक्टेयर या 2.97% बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले वर्ष 175.01 लाख हेक्टेयर था। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में रकबा घटने से इस वृद्धि पर कुछ असर पड़ा।

कपास का रकबा मामूली रूप से घटकर 106.01 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 106.42 लाख हेक्टेयर था। तेलंगाना, गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा बढ़ा, जबकि राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पंजाब में कमी दर्ज की गई।

गन्ने का रकबा भी मामूली घटकर 58.31 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 58.62 लाख हेक्टेयर था। इसके विपरीत जूट और मेस्ता का रकबा मामूली वृद्धि के साथ करीब 6.33 लाख हेक्टेयर हो गया।

बारिश: देशभर में 11% की कमी

बारिश की स्थिति खरीफ बुवाई के रुझान की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि है। 1 जून से 5 अगस्त के दौरान देश में 434.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 491.0 मिमी होती है। इस तरह कुल बारिश में 11% की कमी रही। बारिश की क्षेत्रीय स्थिति असमान चल रही है। मध्य भारत एकमात्र प्रमुख क्षेत्र रहा जहां बारिश सामान्य से अधिक हुई। यहां 549.1 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 559.9 मिमी बारिश हुई, यानी 2% अधिक।

पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में सबसे अधिक 27% की कमी दर्ज की गई। यहां 805.3 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 588.9 मिमी बारिश हुई। दक्षिण प्रायद्वीप में बारिश सामान्य से 18% कम रही। इस क्षेत्र में 399.7 मिमी के सामान्य मुकाबले 327.5 मिमी बारिश हुई। उत्तर-पश्चिम भारत में 12% की कमी रही, जहां 322.8 मिमी के सामान्य स्तर के मुकाबले 285.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।

हालांकि हाल की बारिश की तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। 30 जुलाई से 5 अगस्त के दौरान देश में 66.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 62.7 मिमी होती है। इस तरह इस अवधि में बारिश 7% अधिक रही। मध्य भारत में बारिश 14% अधिक रही, जबकि दक्षिण प्रायद्वीप में यह सामान्य से 39% अधिक रही। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश सामान्य से 2% अधिक रही। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत में 22% की कमी बनी रही।

इस प्रकार हाल के दिनों में बारिश में सुधार के बावजूद मौसमी बारिश की कुल कमी अभी बरकरार है। बारिश का वितरण भी असमान बना हुआ है और जिन क्षेत्रों में कमी अधिक है, वहां जल उपलब्धता की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

जलाशय भंडारण: 166 जलाशयों में सामान्य का 97% पानी

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के 6 अगस्त तक 166 महत्वपूर्ण जलाशयों के आकलन के अनुसार, इन जलाशयों में कुल जल भंडारण 96.966 अरब घन मीटर (BCM) रहा। यह इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 52.82% है। यह पिछले वर्ष इसी समय उपलब्ध 132.368 BCM की तुलना में काफी कम है, हालांकि यह 99.831 BCM के सामान्य भंडारण से मामूली कम है। इस तरह मौजूदा भंडारण पिछले वर्ष के स्तर का केवल 73.25% और सामान्य का 97.13% रहा। 

पांच क्षेत्रों में पश्चिमी क्षेत्र की जलाशय स्थिति सबसे बेहतर रही। यहां निगरानी वाले 53 जलाशयों में 28.899 BCM पानी था, जो कुल क्षमता का 75.86% है। पिछले वर्ष यह 73.76% था, जबकि सामान्य स्तर 56.64% था। इस तरह क्षेत्र का भंडारण सामान्य से 33.95% अधिक रहा। गुजरात और महाराष्ट्र में स्थिति विशेष रूप से मजबूत रही, जहां भंडारण सामान्य से क्रमशः 40.58% और 30.52% अधिक रहा।

पूर्वी क्षेत्र के 27 निगरानी वाले जलाशयों में 10.268 BCM पानी था, जो क्षमता का 47.19% है। हालांकि यह पिछले वर्ष के 54.97% से कम था, लेकिन 42.76% के सामान्य स्तर से अधिक रहा। इस तरह क्षेत्र में सामान्य से 10.36% अधिक भंडारण रहा। ओडिशा, असम, नगालैंड और त्रिपुरा में पिछले वर्ष की तुलना में जल भंडारण बेहतर रहा।

हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान वाले उत्तरी क्षेत्र के 11 जलाशयों में 9.084 BCM पानी था, जो क्षमता का 45.80% है। यह पिछले वर्ष के स्तर का 70.43% और सामान्य का 53.47% था। इस तरह सामान्य की तुलना में 14.35% की कमी रही। तीनों राज्यों में राजस्थान में सामान्य से सबसे अधिक 18.53% की कमी दर्ज की गई।

मध्य क्षेत्र के 28 जलाशयों में 23.022 BCM पानी था, जो कुल क्षमता का 47.38% है। इस क्षेत्र में सामान्य से 13.82% की कमी रही। मध्य प्रदेश में जल भंडारण सामान्य से 21.49% कम और उत्तर प्रदेश में 17.86% कम रहा। छत्तीसगढ़ इस मामले में अपवाद रहा, जहां जल भंडारण सामान्य से 27.40% अधिक था।

दक्षिणी क्षेत्र के 47 निगरानी वाले जलाशयों में 25.693 BCM पानी था, जो क्षमता का 46.47% है। यह पिछले वर्ष के स्तर का 77.96% और सामान्य का 57.21% रहा। इस तरह सामान्य की तुलना में 18.78% की कमी रही, जो पांचों क्षेत्रों में सबसे अधिक है। तेलंगाना में स्थिति विशेष रूप से कमजोर रही। यहां जलाशयों में भंडारण उनकी जीवित क्षमता का केवल 20.92% था और सामान्य से 54.98% कम रहा। तमिलनाडु में भी जल भंडारण सामान्य से 39.58% कम रहा। हालांकि आंध्र प्रदेश में भंडारण सामान्य से मामूली 2.18% अधिक रहा।

पानी की स्थिति से बढ़ी खरीफ की अनिश्चितता

फसल बुवाई, बारिश और जलाशय भंडारण के आंकड़ों को एक साथ देखें तो खरीफ सीजन की स्थिति अभी असमान बनी हुई है। कुल बुवाई में गिरावट की सबसे बड़ी वजह धान का कम रकबा है, जबकि तिलहन क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। दूसरी ओर, पांच में से चार प्रमुख क्षेत्रों में संचयी बारिश सामान्य से कम है और देशभर में जलाशयों का भंडारण पिछले वर्ष के स्तर से नीचे है।

कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि हाल में बारिश में सुधार के बावजूद कुल खरीफ बुवाई और जलाशयों के जल स्तर में अभी बड़ी रिकवरी नहीं हुई है। ऐसे में मानसून के आने वाले सप्ताह देर से होने वाली बुवाई, फसलों की स्थापना और जल भंडारों की भरपाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।