ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की फाइनेंसिंग के लिए नाबार्ड और नाबफिड के बीच समझौता

नाबार्ड और नाबफिड ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे और कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फाइनेंसिंग और सलाह सेवा के मकसद से समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी में सिंचाई, भंडारण, कोल्ड चेन, ग्रामीण सड़कें, वेयरहाउसिंग, पीपीपी परियोजनाएं और कंप्रेस्ड बायोगैस शामिल होंगे, जिससे कनेक्टिविटी, बाजार पहुंच और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) और नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नाबार्ड की विशेषज्ञता तथा दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा वित्तपोषण के क्षेत्र में नाबफिड की विशेषता को साथ लाना है। सहयोग के तहत व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य ऐसी परियोजनाओं के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर दीर्घकालिक वित्त की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत कर सकें।

समझौते के तहत दोनों संस्थान परियोजना के पूरे जीवनचक्र के दौरान संयुक्त वित्तपोषण व्यवस्था और बुनियादी ढांचा संबंधी सलाहकारी सेवाओं की संभावनाएं तलाशेंगे। इसमें परियोजनाओं की पहचान, मूल्यांकन और उचित जांच-पड़ताल, मूल्य निर्धारण तथा संयुक्त निगरानी शामिल होगी। दोनों संस्थान परियोजना की संरचना तैयार करने, वित्तीय मॉडल और ऋण सिंडिकेशन के क्षेत्र में भी मिलकर काम करेंगे। ज्ञान के आदान-प्रदान और बुनियादी ढांचा वित्तपोषण से जुड़ी विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे का सामाजिक और व्यावसायिक, दोनों तरह का महत्व है। उन्होंने वित्तीय रूप से टिकाऊ और बाजार आधारित ढांचे के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को कम करने तथा ग्रामीण समृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।

नाबफिड के प्रबंध निदेशक राजकिरण राय जी. ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कोल्ड-चेन कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और बैंकों के वित्तपोषण योग्य परियोजनाएं विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दिया। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान मिल सकता है।

इस साझेदारी के दायरे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) परियोजनाएं, कृषि मूल्य श्रृंखलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों से मजबूत जुड़ाव रखने वाला बुनियादी ढांचा शामिल होगा। सहयोग के लिए चिन्हित प्रमुख क्षेत्रों में सिंचाई, जल एवं स्वच्छता, फसल कटाई के बाद का भंडारण, कोल्ड-चेन सुविधाएं, टर्मिनल मार्केट, ग्रामीण सड़कें और पुल, वेयरहाउसिंग तथा कंप्रेस्ड बायोगैस शामिल हैं।