हाल के दिनों में प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की मंडियों में दाम काफी बढ़े हैं। वहां अच्छी क्वालिटी का जो प्याज हफ्ते भर पहले 4,400 रुपये प्रति क्विंटल था, वह अब 5,500 रुपये तक पहुंच गया है। औसत भाव भी 4,300 रुपये हो गया है। इस बीच, कीमतों को नियंत्रित करने के मकसद से सरकार प्याज की खपत वाले प्रमुख केंद्रों पर ट्रेन से सप्लाई बढ़ा रही है। अप्रैल-मई में गिरावट के बाद जून में प्याज का निर्यात भी काफी बढ़ा है। इन सबका असर है कि दिल्ली समेत अनेक जगहों पर खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अनुसार, 18 अगस्त को लासलगांव मंडी में प्याज की औसत कीमत 3,700 रुपये और अधिकतम कीमत 4,051 रुपये प्रति क्विंटल थी। वहां 24 अगस्त को औसत दाम 4,251 रुपये और अधिकतम 4,545 रुपये तक पहुंच गए। इस तरह हफ्ते भर में औसत दाम 15 प्रतिशत बढ़े हैं। जून के 2,000 रुपये प्रति क्विंटल से तुलना करें तो औसत दाम दोगुने से भी अधिक हो गए हैं।
इसी तरह सोलापुर मंडी में औसत दाम 2,500 रुपये से बढ़कर 2,900 रुपये और अधिकतम दाम 4,400 रुपये की तुलना में 5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। नासिक मंडी में भी औसत दाम 3,200 रुपये से बढ़कर 4,200 रुपये और अधिकतम दाम 3,951 रुपये के मुकाबले 5,000 रुपये प्रति क्वंटल हो गए।
मंडियों में प्याज की पहुंच
अहिल्यानगर एपीएमसी के सचिव अभय भिसे ने रूरल वॉयस को बताया कि वहां की मंडी में अभी रोजाना 48-49 हजार क्विंटल प्याज पहुंच रहा है। औसत कीमत 3,500-4,000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सबसे अच्छी क्वालिटी वाला प्याज 5,000 रुपये के भाव बिक रहा है। हालांकि इसकी सप्लाई कम है और इसकी खरीद बीज के लिए हो रही है।
सोलापुर एपीएमसी के सचिव अतुल सिंह राजपूत के अनुसार सोमवार, 24 अगस्त को मंडी में 10,520 क्विंटल प्याज की आवक रही। औसत कीमत तो 2,900 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन सबसे अच्छी क्वालिटी का प्याज 5,500 रुपये क्विंटल तक बिका।
कीमतों में तेजी पर महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले का कहना है कि लंबे समय तक भाव 700 रुपये से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल तक थे। तब किसानों को काफी नुकसान हुआ। उस भाव से तुलना करने पर भले इस समय दाम अधिक लग रहे हों, लेकिन किसानों के लिए औसत कीमत कम से कम 3,000 रुपये क्विंटल होनी चाहिए।
सरकार ने शुरू की बफर स्टॉक से बिक्री
सप्लाई में बाधा और त्योहारी मांग के कारण प्याज की कीमतों में आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान तेजी देखने को मिलती है। इससे निपटने के लिए उपभोक्ता मंत्रालय बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री करता है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने हाल ही मीडिया से बातचीत में कहा कि आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख खपत केंद्रों तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाई जा रही है। खुदरा बाजार में NCCF और NAFED के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाएगा।
सरकार के पास चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है। वर्ष 2025-26 में सरकार ने करीब तीन लाख टन और 2024-25 में 4.7 लाख टन प्याज खरीदा था। वर्ष 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन है, जो इससे पिछले वर्ष 307.67 लाख टन था।
इस वर्ष सरकार ने दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य तय किया था। इसके लिए खरीद कीमत मई में 1,270 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई थी, लेकिन उस रेट पर बहुत कम किसान आगे आए। तब खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए कीमतों में सात बार संशोधन करते हुए आखिरकार इसे बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल किया गया।
जून से प्याज निर्यात में तेजी
इस समय प्याज के निर्यात पर कोई अंकुश नहीं है। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव के अनुसार, 2026 (कैलेंडर वर्ष) की पहली छमाही में ताजे प्याज और शैलट (छोटे प्याज) के निर्यात में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
निर्यात जनवरी के 410.4 लाख डॉलर से घटकर फरवरी में 303.7 लाख डॉलर रह गया। मार्च में इसमें मामूली सुधार हुआ और यह 325.4 लाख डॉलर पहुंचा। इसके बाद अप्रैल में निर्यात तेजी से गिरकर 210.6 लाख डॉलर रह गया, जो इस वर्ष का सबसे निचला स्तर था। हालांकि, इसके बाद निर्यात में फिर सुधार हुआ और मई में यह बढ़कर 283.3 लाख डॉलर तथा जून में 390.9 लाख डॉलर हो गया, जो जनवरी के स्तर के लगभग बराबर है। जनवरी से जून के दौरान प्याज और शैलट का कुल 19.24 करोड़ डॉलर का निर्यात हुआ, यानी औसतन करीब 321 लाख डॉलर प्रति माह।
श्रीवास्तव के अनुसार, यह रुझान महीने-दर-महीने निर्यात में काफी उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। इसके पीछे मौसमी घरेलू आवक, भारत में प्याज की कीमतों और उपलब्धता में बदलाव तथा विदेशी बाजारों में मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारण हो सकते हैं। मई और जून में निर्यात में हुई मजबूत रिकवरी से संकेत मिलता है कि अप्रैल में गिरावट अस्थायी थी और यह निर्यात में लंबे समय तक चलने वाली मंदी का संकेत नहीं थी।
घरेलू बाजार में प्याज की ऊंची कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर 2023 में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने प्याज निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। मई 2024 में निर्यात पर प्रतिबंध तो हटा लिया गया, लेकिन 550 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) और 40% निर्यात शुल्क लगाया गया। सितंबर 2024 में निर्यात शुल्क को 40% से घटाकर 20% कर दिया गया। अप्रैल 2025 में बाकी 20% निर्यात शुल्क भी पूरी तरह हटा लिया गया, जिससे प्याज का निर्यात पूरी तरह मुक्त हो गया।