खरीफ 2026-27 के लिए 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य, छह साल में सबसे कम

खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है, जो छह वर्षों में सबसे कम है। मौजूदा खरीफ में अभी तक धान का रकबा पिछले साल से 3.35% पीछे है।

सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2026-27 के लिए 708.64 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। यह कम से कम पिछले छह वर्षों में सबसे कम खरीद लक्ष्य है। केंद्रीय खाद्यान्न खरीद पोर्टल के अनुसार, 2025-26 के सीजन में 810.72 लाख टन धान की खरीद की गई थी। इस वर्ष कम खरीद का फैसला चालू खरीफ सीजन में धान के रकबे में आई गिरावट के बीच लिया गया है।

यह लक्ष्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया गया। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने 1 सितंबर को नई दिल्ली में राज्यों के खाद्य सचिवों की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सचिवों के अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारी भी शामिल हुए।

कम खरीद लक्ष्य के पीछे धान की खेती के रकबे में आई कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। UPAJ पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त 2026 तक धान की बुवाई 414.10 लाख हेक्टेयर में हुई थी। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 428.46 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.35% कम है। इस तरह चालू खरीफ सीजन में धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 14.36 लाख हेक्टेयर कम है।

बेहतर गुणवत्ता वाले चावल के लिए नए मानक

बैठक में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत बेहतर गुणवत्ता वाले चावल (Improved Rice) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की गई। संशोधित मानकों के तहत खरीफ 2026-27 से खरीदे जाने वाले कच्चे चावल में अधिकतम 10% टूटे हुए दाने की अनुमति होगी। पहले यह सीमा 25% थी। इसी तरह, पारबॉयल्ड चावल (Parboiled Rice) में टूटे हुए दानों की अधिकतम सीमा 16% से घटाकर 5% कर दी गई है।

बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद को चरणबद्ध तरीके से खरीद करने वाले राज्यों में बढ़ाया जाएगा। राज्यों से अपनी मिलिंग क्षमता का आकलन करने, आवश्यक अपग्रेड करने और चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए रोडमैप तैयार करने को कहा गया है।

मोटे अनाज की 18.85 लाख टन खरीद का अनुमान

खरीफ 2026-27 के दौरान राज्यों द्वारा 18.85 लाख टन मोटे अनाज (Coarse Grains) की खरीद का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, इस सीजन में मोटे अनाज का रकबा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम है। 28 अगस्त तक मोटे अनाज की बुवाई 177.90 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 182.11 लाख हेक्टेयर थी। यानी इसमें 2.31% की कमी आई है।

बैठक में मोटे अनाज, मिलेट और छोटे मिलेट की खरीद एवं वितरण योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 2025-26 में 16.38 लाख टन मोटे अनाज और मिलेट्स की खरीद की गई थी, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।

भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर

बैठक में नई भंडारण नीति (New Storage Policy) की भी समीक्षा की गई। इस नीति का उद्देश्य खाद्यान्न की खरीद और उठाव के बीच बढ़ते अंतर, क्षेत्रीय भंडारण असंतुलन और मौजूदा भंडारण क्षमता के कम उपयोग जैसी समस्याओं को दूर करना है। नीति के तहत 131 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार करने का लक्ष्य है। इसमें राज्यों द्वारा 111 लाख टन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा 20 लाख टन क्षमता विकसित की जाएगी। संबंधित राज्यों से इसके लिए समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है।

राज्यों को अपनी खाद्यान्न भंडारण सुविधाओं को दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत करने की सलाह भी दी गई है। यह गोदामों के स्व-मूल्यांकन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। राज्यों से निर्धारित समयसीमा में आकलन पूरा करने तथा केंद्रीय भंडारण निगम (CWC), एफसीआई और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से उपलब्ध प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता का लाभ उठाने को कहा गया है।

सरकार के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य खाद्यान्न खरीद व्यवस्था को मजबूत करना, कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित चावल की गुणवत्ता में सुधार करना और भंडारण बुनियादी ढांचे का विस्तार कर खाद्यान्न प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।