पद्म पुरस्कार 2026: चार किसानों और पांच कृषि वैज्ञानिकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान, विशेष योगदान को मिली पहचान

कृषि, पशुपालन और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चार किसानों और पांच वैज्ञानिकों को पद्म सम्मान के लिए चुना गया है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी कर दी है। इस वर्ष कुल 131 लोगों को पद्म सम्मानों से नवाजा जाएगा, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। सूची में 19 महिलाएं और 16 मरणोपरांत सम्मान पाने वाले नाम भी शामिल हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान एवं विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पांच वरिष्ठ वैज्ञानिकों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है।

डॉ. अशोक कुमार सिंह (पूर्व निदेशक, आईएआरआई पूसा)
डॉ. अशोक कुमार सिंह देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने धान विशेषकर बासमती किस्मों के विकास और सुधार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नेतृत्व में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने उच्च उपज देने वाली, रोग-रोधी और बेहतर गुणवत्ता वाली बासमती किस्में विकसित कीं, जिससे भारत की बासमती चावल की वैश्विक प्रतिष्ठा मजबूत हुई। उनके शोध कार्यों से किसानों की आय बढ़ी और निर्यात क्षमता को भी नई दिशा मिली।

डॉ. पी. एल. गौतम (पूर्व अध्यक्ष, NBA व PPVFRA)
डॉ. पी. एल. गौतम ने भारत में जैव विविधता संरक्षण और पौध किस्मों के अधिकार (Plant Variety Protection) को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने किसानों के बीज अधिकारों की रक्षा, पारंपरिक किस्मों के पंजीकरण और जैव संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच विश्वास आधारित ढांचा मजबूत हुआ।

डॉ. के. रामास्वामी (पूर्व कुलपति, TNAU)
डॉ. के. रामास्वामी ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को एकीकृत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू कीं। उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसान-वैज्ञानिक संवाद को सशक्त बनाया।

डॉ. जी. एल. त्रिवेदी (पूर्व कुलपति, RPCAU)
डॉ. जी. एल. त्रिवेदी ने पूर्वी भारत में कृषि अनुसंधान और उच्च शिक्षा को मजबूती देने में योगदान दिया। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उन्होंने फसल विविधीकरण, टिकाऊ कृषि प्रणाली और ग्रामीण युवाओं को कृषि शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कार्य किया। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने क्षेत्रीय कृषि समस्याओं पर केंद्रित शोध को प्राथमिकता दी, जिससे स्थानीय किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।

डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति (पूर्व डीन, TANVASU)
डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति ने पशुपालन और पशु चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (TANVASU) में डीन रहते हुए उन्होंने पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और आधुनिक पशु प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके कार्यों से पशुपालकों की उत्पादकता बढ़ी और डेयरी व पशुधन आधारित आजीविका को वैज्ञानिक आधार मिला।

इन किसानों को पद्म सम्मान

कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चार किसानों को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।