निर्यातकों को संकट से उबरने में मदद करेगी सरकार, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सरकार भारतीय निर्यातकों की मदद के लिए सभी नीतिगत विकल्पों पर काम कर रही है।
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार सभी उपलब्ध नीतिगत उपायों का उपयोग करेगी। यह बात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) द्वारा आयोजित वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव के दौरान कही।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि स्थिति पर लगातार समीक्षा की जा रही है और एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने के लिए सरकार हर पॉलिसी टूल और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन भी किया है।
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद भारतीय निर्यातकों को पश्चिम एशिया और खाड़ी के देशों में माल भेजने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। जंग के हालत से सप्लाई चेन बाधित हुई हैं और माल ढुलाई व बीमा की लागत बढ़ गई है।
गोयल ने कहा कि सरकार बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि निर्यातकों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उपाय खोजे जा सकें। उन्होंने दावा किया कि अपने एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट करने में हम पीछे नहीं रहेंगे। सरकार ऐसे उपायों पर काम कर रही है जिनसे निर्यातकों को राहत मिल सके। उम्मीद है कि अगले दो दिनों में कुछ कदम अंतिम रूप ले लेंगे।
आईआईएफटी द्वारा भारत मंडपम में आयोजित वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव 2026 में “विकसित भारत 2047 के लिए उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की नई कल्पना” विषय पर मंथन हुआ। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक कुलपति, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय शिक्षा को वैश्विक मंच तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है और इस दिशा में आईआईएफटी की पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते अंतिम रूप दिए हैं, जिससे व्यापार, सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग के नए अवसर खुले हैं।

आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने शैक्षणिक जगत को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां भारतीय संस्थानों के वैश्विक विस्तार और विकसित भारत 2047 के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य में उनकी भूमिका पर विचार किया गया। उन्होंने कहा, “भारत के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की अपार क्षमता है। वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव जैसी पहलों के माध्यम से आईआईएफटी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है, जिससे भारतीय उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को मजबूती मिलेगी।”
कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों, छात्र गतिशीलता, नियामकीय ढांचे और भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की रणनीतियों पर विषयगत चर्चाएं और विशेषज्ञ संवाद आयोजित किए गए। इस दौरान उच्च शिक्षा के उभरते वैश्विक रुझानों और वैश्विक शिक्षा सेवा बाजार में भारत की उपस्थिति मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में कई प्रमुख शिक्षाविद शामिल हुए, जिनमें द नॉर्थकैप यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. प्रेम व्रत, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संतिश्री धुलीपुडी पंडित, भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रो. टी. जी. सीताराम और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे शामिल थे। इसके अलावा वरिष्ठ नीति-निर्माता, शिक्षा क्षेत्र के नेता और वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में शामिल हुए।

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