केंद्र सरकार ने ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमिता से जोड़ने और छोटे एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक राष्ट्रीय पहल शुरू की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को इस पहल का शुभारंभ किया। इसके तहत देशभर में 20 हजार नए कृषि-उद्यमी तैयार करने और उनके माध्यम से 20 लाख से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों तक कृषि सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पहल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड सहित प्रमुख कृषि राज्यों में लागू की जाएगी। कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर किसानों को कृषि सलाह, मिट्टी परीक्षण, कृषि मशीनरी सेवाएं, वित्तीय सेवाओं से जुड़ाव, बाजार संपर्क और आय के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराएंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित कृषि और समृद्ध गांवों के बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खेती की लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि को लाभकारी बनाने पर भी है।
उन्होंने कहा कि छोटी जोत वाले किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। ऐसे किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना जरूरी है। ‘प्रगति’ पहल किसानों को तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को परंपरागत खेती के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ना होगा। इससे किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने ड्रोन, डिजिटल कृषि सलाह और वैज्ञानिक खेती को कृषि के भविष्य का महत्वपूर्ण आधार बताया।
कई संस्थाओं की साझेदारी
‘प्रगति’ को निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली एक बड़ी कृषि-उद्यमिता पहल के रूप में पेश किया गया है। इसमें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं साझेदार के रूप में शामिल हैं। इनमें पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, हेइफ़र इंटरनेशनल, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी, द सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन (SAFIA), एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) शामिल हैं।
कृषि-उद्यमि नेटवर्क का होगा विस्तार
‘प्रगति’ पहल को एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) द्वारा देश के 14 राज्यों में लागू की गई पूर्ववर्ती कृषि-उद्यमिता पहलों से मिले अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। देश में मौजूदा 26 हजार से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क के अतिरिक्त इस कार्यक्रम के तहत 20 हजार नए कृषि-उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य है।
इस पहल से 20 लाख से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। कार्यक्रम में महिला किसानों और महिला कृषि-उद्यमियों की भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है। चौहान ने कहा कि बड़ी संख्या में ‘कृषि सखी’ और महिला उद्यमी ग्रामीण कृषि परिवर्तन की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती हैं।
किसानों की बढ़ाने का लक्ष्य
‘प्रगति’ पहल के तहत किसानों की आय में कम से कम 30 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य है।
कार्यक्रम से जुड़े कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियां (Regenerative Agricultural Practices) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और किसानों की औपचारिक वित्तीय प्रणालियों तक पहुंच का विस्तार करने पर भी जोर दिया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवर्तन का संकल्प है। इसके माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार राज्यवार कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक आधार पर फसल योजना तैयार कर कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में काम कर रही है।