RBI ने साढ़े तीन साल बाद महंगा किया कर्ज, रेपो रेट 0.25% बढ़कर 5.50% हुआ, इस वर्ष 5.2% महंगाई का अनुमान

RBI ने महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है, जबकि खुदरा महंगाई 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को नीतिगत रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। महंगाई के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। समिति ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग (संतुलित सख्ती) कर दिया है। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में ब्याज दर में कटौती की संभावना नहीं है।

ब्याज दर में यह बढ़ोतरी करीब साढ़े तीन साल बाद की गई है। इससे पहले फरवरी 2023 में रेपो रेट 6.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अप्रैल 2022 से फरवरी 2023 के दौरान छह बार में रेपो रेट 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था।

महंगाई की चिंता से बढ़ी ब्याज दर

5 से 7 अक्टूबर 2026 तक हुई MPC की 63वीं बैठक RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई। समिति ने कहा कि महंगाई का परिदृश्य पिछले साल जैसा अनुकूल नहीं है। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.5 प्रतिशत थी। इसकी प्रमुख वजह खाद्य और ईंधन महंगाई में बढ़ोतरी रही। खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी अब अधिक व्यापक हो गई है और चीनी तथा प्याज जैसी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ईंधन और खाद्य पदार्थ छोड़कर बाकी चीजों की कोर महंगाई भी अगस्त में बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि लगातार तीन महीने तक यह 3.9 प्रतिशत पर बनी हुई थी। कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई 2.9 प्रतिशत रही। अगस्त में खुदरा महंगाई बास्केट की करीब 37 प्रतिशत वस्तुओं में महंगाई 4 प्रतिशत से अधिक रही, जो कीमतों के दबाव के व्यापक होने का संकेत है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5.2 प्रतिशत रखा है। दूसरी तिमाही में इसके 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 5.6 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2026-27 में कोर महंगाई 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून, मजबूत अल नीनो परिस्थितियां और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल तथा अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से आपूर्ति पक्ष की महंगाई का दबाव बना रह सकता है।

फिलहाल ब्याज दरों में कटौती के संकेत नहीं

नीति के रुख को कैलिब्रेटेड टाइटनिंग में बदलना भी महत्वपूर्ण है। RBI ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में निकट भविष्य में रेपो रेट में कटौती की संभावना नहीं है। आगे की नीति या तो दर बढ़ाने या दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के रूप में हो सकती है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आगे ब्याज दर बढ़ाने के चक्र की अवधि और उसकी सीमा वास्तविक आर्थिक वृद्धि और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगी। समिति के दो सदस्य - डॉ. नागेश कुमार और प्रो. राम सिंह - नीति के रुख को न्यूट्रल बनाए रखने के पक्ष में थे।

आर्थिक विकास की रफ्तार मजबूत

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद RBI ने घरेलू अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक रुख बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो अनुमान से अधिक है। निजी खपत, स्थिर निवेश, वस्तु निर्यात और सेवाओं की मजबूत गतिविधि ने विकास को गति दी।

जुलाई-अगस्त के उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई है, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में इसमें कुछ कमी आई है। लागत संबंधी दबावों के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, जबकि घरेलू और बाहरी मांग के कारण सेवा क्षेत्र में भी गतिविधियां अच्छी हैं।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही में वृद्धि 7.2 प्रतिशत, तीसरी में 6.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विकास अनुमान में 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।

पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक जोखिम बढ़े

केंद्रीय बैंक ने कहा कि सितंबर से पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर बढ़ने और इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ने वैश्विक धारणा को प्रभावित किया है और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। वैश्विक विकास अभी मजबूत बना हुआ है, लेकिन 2026 में इसके पिछले वर्ष की तुलना में धीमा रहने का अनुमान है। ऊर्जा और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी से कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी है, जिसके चलते प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति को सख्त किया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी।

मानसून और तेल कीमतों से महंगाई का जोखिम

आरबीआई ने कहा कि कमजोर और असमान मानसून तथा मजबूत अल नीनो परिस्थितियां आगामी रबी सीजन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, गैर-कृषि गतिविधियों में मजबूती ग्रामीण खपत को सहारा देती रहेगी।

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। RBI ने कहा कि आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने से इसके प्रभाव को कुछ हद तक सीमित किया जा रहा है।

सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूत गतिविधि और रोजगार की व्यापक रूप से स्थिर स्थिति से शहरी मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है। मजबूत क्षमता उपयोग, बेहतर क्रेडिट प्रवाह, सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च और निजी पूंजीगत निवेश में संभावित सुधार से निवेश गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।