उत्तर प्रदेश में तीस हजार करोड़ की लागत से लगेंगे तीन नये यूरिया संयंत्र

उत्तर प्रदेश में करीब Rs 30,000 करोड़ के निवेश से तीन नए यूरिया संयंत्र लगाने की तैयारी है। प्रस्तावित संयंत्र गोरखपुर, जगदीशपुर और शाहजहांपुर में लगाए जा सकते हैं। केंद्र सरकार अगले एक माह में इस पर फैसला ले सकती है। बढ़ती खपत और आयात निर्भरता घटाने के उद्देश्य से सरकार यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

उत्तर प्रदेश में तीस हजार करोड़ की लागत से लगेंगे तीन नये यूरिया संयंत्र

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों के पहले तीन नये यूरिया उत्पादन संयंत्रों की स्थापना की घोषणा हो सकती है। इन संयंत्रों पर करीब तीस हजार करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। इस संबंध में केंद्र सरकार अगले एक माह में फैसला ले सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले साल की पहली तिमाही में विधान सभा चुनाव हैं। इसलिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार इस बड़े फैसले को एक बड़ी औद्योगिक निवेश पहल के रूप में पेश करना चाहेगी।

सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यह तीन यूरिया संयंत्र गोरखपुर, जगदीशपुर और शाहजहांपुर में लगाए जाएंगे। गोरखपुर में सहकारी संस्था कृभक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड (कृभको) की सब्सिडियरी कृभको फर्टिलाइजर्स का एक यूरिया उत्पादन संयंत्र है। कृभको ने नया यूरिया उत्पादन संयंत्र लगाने के लिए केंद्र सरकार को आवेदन दिया है। इसके साथ ही जगदीशपुर में इंडो रामा नया यूरिया संयंत्र लगाना चाहती है, जबकि गोरखपुर में सार्वजनिक क्षेत्र की उर्वरक कंपनी हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) नया यूरिया संयंत्र लगाने की इच्छुक है।

एचयूआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस.पी मोहंती ने रूरल वॉयस को बताया कि हमारे बोर्ड ने गोरखपुर में पहले से मौजूद संयंत्र के साथ ही नया यूरिया उत्पादन संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हम इसकी तैयारी पर आगे बढ़ रहे हैं। जैसे ही हमें केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है, हम नये संयंत्र की स्थापना पर काम शुरू कर देंगे। एचयूआरएल के पहले संयंत्र में जापानी कंपनी टोलो ने प्लांट लगाया है। अगला प्लांट भी उसी कंपनी के जरिये लगाया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य में नये यूरिया संयंत्रों की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं। खासतौर से गोरखपुर संयंत्र पर वह संबंधित कंपनी के साथ बैठकें भी कर चुके हैं।

देश में सालाना करीब 400 लाख टन यूरिया की खपत होती है। देश में 300 लाख टन यूरिया का उत्पादन होता है और बाकी 100 लाख टन का आयात किया जाता है। हर साल देश में तीन से चार फीसदी की दर से यूरिया की खपत बढ़ रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि यूरिया उत्पादन के मामले में देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े ताकि खाड़ी युद्ध जैसे संकट के समय प्रतिकूल स्थिति का सामना न करना पड़े। इसलिए कुछ माह पहले नई यूरिया प्रोत्साहन नीति की भी घोषणा की गई थी। 

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