संयुक्त किसान मोर्चा ने उर्वरकों की कमी, डीजल के दाम बढ़ाए जाने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर 27 मई से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसने देश के सभी किसान और खेत मजदूर संगठनों से हर गांव में एमएसपी आदेश की प्रतियां जलाने और उर्वरकों की कालाबाजारी तथा डीजल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया। मोर्चा ने 17 जून को राष्ट्रीय परिषद की बैठक और 28 जुलाई को नई दिल्ली में अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की है, जहां आगे की योजना तय की जाएगी।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इस सिलसिले में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इसमें कहा गया है कि मोर्चा ने खरीफ 2026-27 के एमएसपी, पेट्रोल-डीजल के दाम में 3.90 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि और उर्वरकों के संकट के मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ संघर्ष शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका कहना है, सरकार को जानकारी थी कि हर वर्ष इस मौसम में उर्वरकों की मांग बढ़ती है, फिर भी उसने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की। इससे किसानों के लिए डीजल और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई।
एसकेएम का दावा है कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रचारित प्राकृतिक खेती से फसल उत्पादन में कम से कम 30% की गिरावट आएगी। इसका आरोप है कि मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट लॉबी, अमेरिकी साम्राज्यवाद और वैश्विक कृषि-रसायन कार्टेल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है, जबकि देश में हर दिन 48 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
इसका कहना है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) अब भी 2011-12 के पुराने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का उपयोग कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने 2023-24 में नया आधार वर्ष घोषित कर दिया था। आयोग राष्ट्रीय औसत और तीन वर्षीय औसत उत्पादन पद्धति का उपयोग कर लागत को कम करके दिखाता है और किसानों के श्रम का मूल्य न्यूनतम मजदूरी से भी कम आंकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग के सी2+50% फार्मूले को लागू करने से इनकार कर रही है और उसकी जगह A2+FL जैसी अधूरी लागत पद्धति लागू कर रही है।
एसकेएम का आरोप है कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच 20 प्रमुख फसलों के किसानों को 27 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो मिल मालिकों, निर्यातकों और बिचौलियों को मिला। केवल 2025-26 खरीफ में धान, कपास, सोयाबीन और मक्का जैसी चार फसलों से किसानों को 2.64 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मोर्चा का कहना है कि 83% किसानों को एमएसपी कभी नहीं मिलता। अक्टूबर 2025 में सोयाबीन एमएसपी से 21% नीचे, मूंग 24% नीचे, मक्का 24% नीचे, मूंगफली 26% नीचे, रागी 35% नीचे और धान 1.8% नीचे बिका।