2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर शुल्क के खिलाफ याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर MDR लगाने के खिलाफ याचिका पर केंद्र, RBI और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार किया। सरकार की दलील है कि अधिकांश उपयोगकर्ता इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2,000 रुपये से अधिक के UPI पर्सन-टू-मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने सरकार के MDR लागू करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना प्रस्तावित है।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने पीठ को बताया कि भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल करने वाले 96 प्रतिशत लोग इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि यह मामला कानूनी मुद्दे से अधिक तकनीकी विषय से जुड़ा प्रतीत होता है।

अधिवक्ता अंजन दत्ता ने इस सिलसिले में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने तब तक MDR पर रोक लगाने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया।

नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। करीब छह वर्षों से UPI भुगतान के लिए शुल्क-मुक्त व्यवस्था लागू है। हालांकि, सरकार ने पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन को MDR से बाहर रखा है। UPI लेनदेन की संख्या में P2P भुगतान की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत और कुल लेनदेन मूल्य में 70 प्रतिशत है। इन लेनदेन पर राशि चाहे कितनी भी हो, कोई शुल्क नहीं लगेगा।

उच्च मूल्य वाले मर्चेंट भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर भी यह शुल्क 300 रुपये से अधिक नहीं होगा। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों तथा स्टॉकब्रोकर और डीलरों के माध्यम से होने वाले भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। इस श्रेणी में भी शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।